हर घर में दो चीजें कॉमन होती हैं—प्यार… और झगड़ा। लेकिन सोचिए, अगर वही झगड़ा संस्कृत में हो तो? आवाज़ वही, गुस्सा वही… लेकिन बाहर वालों को लगे— घर में हवन चल रहा है। यहीं से शुरू होती है शादीशुदा जीवन की सबसे ‘संस्कारी कॉमेडी’। “झगड़ा नहीं, संस्कारिक संवाद” आमतौर पर पति-पत्नी का झगड़ा मोहल्ले की breaking news बन जाता है। लेकिन अगर वही संवाद संस्कृत में हो— तो गुस्सा भी श्लोक जैसा लगेगा। “त्वं मां न शृणोषि!” “त्वमेव दोषी असि!” अब पड़ोसी confuse—ये बहस है या कोई वैदिक अनुष्ठान? “इमेज बिल्डिंग का…
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