बच्चों ने ‘इज्जत’ कमाई—Boot Polish आज भी सिस्टम को आईना दिखाती है

1954… सिनेमा रंगीन नहीं था, लेकिन दर्द बहुत गहरा था। सड़क किनारे बैठे दो बच्चे…एक के हाथ में ब्रश, दूसरे की आंखों में भूख। Boot Polish सिर्फ एक फिल्म नहीं है—ये उस भारत की तस्वीर है, जहां “भीख” और “मेहनत” के बीच रोज जंग होती थी… और आज भी होती है। कहानी: जब पेट और स्वाभिमान आमने-सामने खड़े हो जाएं भोला और बेलू—दो बच्चे, जिनके पास ना माँ है, ना बाप का सहारा। बचा क्या? एक क्रूर चाची और सड़कों की धूल। भीख मांगना उनकी मजबूरी बना दिया जाता है।…

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