उत्तराखंड में त्रिपुरा के एक छात्र की हत्या सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं है, यह भारत के सामाजिक विवेक पर लगा एक गहरा घाव है।यह वही देश है जिसे हर कोने के लोगों ने अपने खून-पसीने से सींचा, फिर भी सवाल उठता है— क्या North-East आज भी “अपना” नहीं माना जाता? ‘Chinky’, ‘Momo’—ये मज़ाक नहीं, ज़हर हैं हम इसे अक्सर मज़ाक कहकर टाल देते हैं— “अरे यार, मज़ाक ही तो है” लेकिन सच्चाई यह है कि यह मज़ाक नहीं, वर्षों से पनपती नस्लीय नफरत है। शब्द पहले मारते हैं, फिर…
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