संगठन मोड में Nitish—JDU दफ्तर से दिया बड़ा सियासी संदेश

Bihar की सियासत में एक दिलचस्प मोड़ दिख रहा है— Nitish Kumar अब मुख्यमंत्री की कुर्सी से दूर जरूर हैं, लेकिन राजनीति से नहीं। बल्कि अब उनका पूरा फोकस “पावर” से हटकर “पावर स्ट्रक्चर” पर है—यानी संगठन को जड़ से मजबूत करना। संगठन पुरुष नीतीश Janata Dal (United) के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर नीतीश कुमार अब पहले से ज्यादा एक्टिव नजर आ रहे हैं।प्रदेश कार्यालय पहुंचकर उन्होंने साफ संकेत दिया— अब लड़ाई चुनावी मंच से ज्यादा संगठन के भीतर लड़ी जाएगी। यह दौरा औपचारिक कम और रणनीतिक ज्यादा माना जा रहा…

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संसद में गूंजा ऋग्वेद, सियासत में सिग्नल बड़ा! “मोदी का मंत्र या मास्टरस्ट्रोक?

संसद शुरू होने वाली है… लेकिन आवाज़ कानून की नहीं, वेदों की गूंजी। दिलचस्प बात ये नहीं कि श्लोक बोला गया—खतरनाक ये है कि उसका मतलब आज की राजनीति से जोड़ा गया। और सबसे बड़ा सवाल—क्या ये सिर्फ शब्द हैं या आने वाले सत्ता समीकरण का ट्रेलर? दूसरी सुबह होती है, सूरज निकलता है… लेकिन इस बार ‘उषा’ संसद में उतरी। और जब सत्ता ‘उषा’ की बात करे, तो समझिए अंधेरे की पहचान हो चुकी है। लेकिन क्या ये रोशनी सच में महिलाओं तक पहुंचेगी, या सिर्फ भाषणों में चमकेगी?…

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जयंती नहीं, चेतावनी भी! क्यों आज जरूरी हैं बाबा साहब आंबेडकर के विचार?

हर साल जयंती आती है, फूल चढ़ते हैं, भाषण होते हैं… लेकिन असली सवाल वहीं रह जाता है—क्या हम सच में डॉ. भीमराव आंबेडकर को समझ पाए हैं? या फिर उन्हें सिर्फ तस्वीरों तक सीमित कर दिया है? आज के भारत में, जहां समानता और अधिकार की बहस अब भी जिंदा है, बाबा साहब के विचार पहले से कहीं ज्यादा प्रासंगिक नजर आते हैं। संघर्ष से संविधान तक—एक असाधारण यात्रा डॉ. आंबेडकर का जीवन केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि एक आंदोलन की शुरुआत था। समाज के सबसे निचले…

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