कभी-कभी सिनेमा सिर्फ मनोरंजन नहीं करता, सीधे पेट में मुक्का मार देता है। 1980 की फिल्म Albert Pinto Ko Gussa Kyun Aata Hai ऐसी ही सिनेमाई चोट है। यहाँ हीरो बंदूक नहीं उठाता, बस गुस्सा करता है… और उसका गुस्सा इतना असली है कि आज भी स्क्रीन से निकलकर सीधे व्यवस्था की कॉलर पकड़ लेता है। गुस्से का मैकेनिक: कहानी जो आज भी चुभती है फिल्म में Naseeruddin Shah अल्बर्ट पिंटो बने हैं, मुंबई का एक युवा कार मैकेनिक। वह उन मजदूरों से नाराज़ रहता है जो हड़ताल करते हैं। क्योंकि…
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75 साल के नसीर साहब: जिनकी असली एक्टिंग ऑफ स्क्रीन भी चलती रही
1975 में ‘निशांत’ से फिल्मी करियर की शुरुआत करने वाले नसीरुद्दीन शाह जब पहली बार पर्दे पर आए, तो खुशी के बजाय उदासी ज़्यादा थी। दूरदर्शन में रिजेक्शन, निजी जीवन की उथल-पुथल और कलाकार के रूप में पहचान बनाने की जद्दोजहद – ये सब उनकी कहानी के अहम हिस्से हैं। पिता से दूरी, माँ से गहरा लगाव नसीर के अपने पिता से संबंध बहुत अच्छे नहीं थे। पर उनकी माँ, जो ग़ुस्से में भी स्नेह लुटाती थीं, हमेशा उनका सहारा बनी रहीं। उनकी आत्मकथा ‘And Then One Day’ में माँ…
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