आज की 300 करोड़ वाली चमकदार फिल्मों के दौर में 1958 की एक ब्लैक-एंड-व्हाइट फिल्म अब भी कई निर्देशकों की नींद उड़ा सकती है। जिस कहानी को आज लोग “नया कॉन्सेप्ट” कहकर बेचते हैं, उसे ‘मधुमती’ दशकों पहले स्क्रीन पर जी चुकी थी। अगर आपने इसे सिर्फ पुरानी फिल्म समझकर छोड़ दिया, तो समझिए आपने भारतीय सिनेमा का असली DNA मिस कर दिया। जब Bollywood बच्चा था, तब यह फिल्म जवान थी 1958 में बनी मधुमती कोई साधारण फिल्म नहीं थी। यह वो दौर था जब तकनीक सीमित थी, बजट छोटे…
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