लखनऊ की दोपहर… कैमरों की चमक, माइक्स की भीड़… और मंच पर खड़े Akhilesh Yadav। आवाज में तल्खी थी, शब्दों में सियासी बारूद। उन्होंने सिर्फ बयान नहीं दिया—उन्होंने एक नैरेटिव को तोड़ने की कोशिश की। “MoU… MoU… MoU…!” ये सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि अखिलेश के मुताबिक “सरकार का सबसे बड़ा illusion” बन चुका है। ‘MoU’ या ‘माहौल बनाने की मशीन’? अखिलेश यादव ने सबसे पहला हमला सरकार के उन निवेश समझौतों पर किया जिन्हें अब तक विकास का चेहरा बताया जाता रहा है। उनका आरोप सीधा था— “ये MoU जमीन…
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