ईद की नमाज खत्म हुई… दुआओं के बीच अचानक गोलियों की आवाज गूंजी… और पाकिस्तान का सबसे सुरक्षित आतंकी अड्डा ‘मरकज तैयबा’ खून से लाल हो गया। जिस किले में घुसना नामुमकिन माना जाता था, वहां घुसकर किसी ने खेल खत्म कर दिया—वो भी लश्कर के ‘रीढ़’ माने जाने वाले बिलाल सलाफी का। सवाल अब ये नहीं कि हमला कैसे हुआ… सवाल ये है कि अंदर तक पहुंचा कौन? ‘अभेद्य किला’ या कागज़ की दीवार? मुरीदके का मरकज तैयबा—जहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता… यही दावा था। लेकिन ईद…
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