दिवाली गाइड: मिठाई से जुआ तक, पुलिस से पंडित तक, सबका ध्यान रखो

“ये रोशनी का पर्व है साहब, लेकिन अगर आंखें ही बंद रखोगे तो उजाला कहां से दिखेगा?” हर साल दिवाली आती है – रौशनी, मिठाई, नई खरीदारी, Instagram स्टोरीज़ और पटाखों के साथ। लेकिन उसी के साथ आते हैं – जुए की लत, मिलावटी मिठाइयां, प्रदूषण, हादसे और पुलिस केस। अब जब समाज सुधारक बनने का मौका खुद दिवाली दे रही है, तो एक पोस्ट तो बनती है Boss! जुए में लक्ष्मी नहीं, चार्जशीट आती है! “बस 10 रुपये के पत्ते, हल्का-फुल्का गेम है यार…” यही कहते-कहते लोग ताश के…

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