भारत में जाति को लेकर बहस अक्सर शोर में बदल जाती है, जहां पहचान को विचारधारा के खिलाफ खड़ा कर दिया जाता है। इसी माहौल में जब मैं कहता हूँ कि “मैं सवर्ण हूँ, लेकिन सोशल जस्टिस का कट्टर समर्थक हूँ”, तो उसे या तो अपवाद माना जाता है या संदेह की नजर से देखा जाता है। जबकि हकीकत इससे कहीं ज्यादा सीधी और संवैधानिक है। पहचान बनाम विचारधारा सवर्ण होना कोई वैचारिक प्रमाणपत्र नहीं है, मैं जन्मा ब्राहमण लेकिन पंडित नहीं हूँ क्योंकि मैं वेदपाठी नहीं हूँ। ठीक वैसे…
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CJI पर हमला? मां बोलीं- संविधान सिखाता है जीओ और जीने दो!
भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई पर सुप्रीम कोर्ट में एक वकील द्वारा हमला करने की कोशिश की गई। इस संवेदनशील घटना पर चीफ़ जस्टिस की मां कमल ताई गवई ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए संविधान की मूल आत्मा की याद दिलाई। क्या हुआ कोर्ट में? सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के दौरान एक वकील ने CJI गवई पर जूता फेंकने की कोशिश की। कोर्टरूम में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई।हालांकि CJI गवई ने पूरे संयम के साथ कार्यवाही जारी रखी, जबकि सुरक्षा कर्मियों ने वकील…
Read Moreदुनिया को जानो बाबू: वक़्फ़ पर सियासी संग्राम! हक़ीक़त बनाम हाइप
वक़्फ़ प्रबंधन से जुड़ा विधेयक कुछ ही घंटों में राजनीतिक बयानबाज़ी और धारणाओं का अखाड़ा बन गया। जहाँ एक तरफ विरोध करने वालों ने इसे मुसलमानों की संपत्ति पर हमला बताया, वहीं दूसरी ओर समर्थकों ने इसे “वक़्फ़ के आतंक” से मुक्ति का रास्ता कहा। ये बहस केवल विधायी नहीं थी, बल्कि एक सोच को स्थापित करने की कोशिश भी थी। क्या इस्लामी देशों में वक़्फ़ होता ही नहीं? बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने संसद में यह दावा कर दिया कि कई इस्लामिक देशों में वक़्फ़ जैसी कोई संस्था नहीं…
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