लखनऊ की चमकती सड़कों के नीचे जैसे कोई चुपचाप साज़िश पल रही थी… ऊपर रिबन कट रहा था, नीचे मिट्टी खिसक रही थी। सिर्फ दो दिन — और “ड्रीम प्रोजेक्ट” ने खुद ही अपना पोस्टमार्टम लिख दिया।ये कोई साधारण गड्ढा नहीं, ये सिस्टम के आत्मविश्वास में पड़ा वो छेद है, जो हर बारिश में चौड़ा होता जाता है। उद्घाटन से धंसान तक: 48 घंटे की कहानी 13 मार्च को बड़े मंच, बड़े चेहरे और बड़ी उम्मीदों के बीच ग्रीन कॉरिडोर का उद्घाटन हुआ। लेकिन 48 घंटे भी नहीं बीते कि…
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Hazratganj: पार्किंग में कूड़े का ढेर- कैसे मुस्करा सकते हैं बताइए साहेब ?
प्रदेश में स्वच्छ भारत अभियान के पोस्टर चमक रहे हैं, भाषण गूंज रहे हैं और दावे आसमान छू रहे हैं। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और कहानी कहती है। लखनऊ के दिल कहे जाने वाले हजरतगंज की एक प्रमुख पार्किंग में कूड़े का ढेर लगा है। तस्वीरें साफ बता रही हैं कि सफाई के दावे और सच्चाई के बीच दूरी अभी भी बरकरार है। VIP इलाका, लेकिन हाल आम से भी बदतर? चौंकाने वाली बात ये है कि यह पार्किंग मुख्यमंत्री आवास, राजभवन, जिलाधिकारी आवास और नगर निगम कार्यालय से कुछ…
Read MoreOld Lucknow Road Condition: चलना भी चुनौती, गाड़ी तो भूल जाइए
Old Lucknow की पहचान उसकी तहज़ीब, भीड़ और रौनक से होती है, लेकिन इन दिनों Kakkad Park चौपटिया से संदोहन माता मंदिर और वहां से Nakhas Chauraha या सहादतगंज तक की सड़कें किसी heritage नहीं, बल्कि hazard zone बन चुकी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क अब “चलने लायक” नहीं, बल्कि झेलने लायक बची है। हर मीटर पर इम्तिहान इस पूरे रूट पर सब्जजी की दुकानें, अतिक्रमण कुछ ऐसा है कि दोपहिया हो या पैदल यात्री हर किसी को रोज़ का एडवेंचर पैकेज मुफ्त में मिल रहा है।…
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