जब दरगाह पहनती है पीला रंग: बसंत पंचमी का सूफियाना जश्न

दिल्ली की हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया दरगाह में बसंत पंचमी सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि 700 साल पुरानी एक ज़िंदा परंपरा है। यह परंपरा न कैलेंडर देखती है, न धर्म की दीवारें—यह बसंत, संगीत और इंसानी जुड़ाव की कहानी कहती है। Amir Khusrau से शुरू हुई परंपरा इतिहास बताता है कि जब सूफी संत निज़ामुद्दीन औलिया अपने प्रिय शिष्य के वियोग में उदास थे, तब अमीर खुसरो ने बसंत पंचमी के दिन पीले कपड़े पहनकर, सरसों के फूल लाकर और गीत गाकर अपने गुरु का मन बहलाया।वहीं से जन्म हुआ—इस अनोखी…

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ज्ञान की देवी, उम्मीदों की खेती! Happy Basant Panchami

बसंत पंचमी सिर्फ़ एक त्योहार नहीं, बल्कि नई सोच, नई शुरुआत और ज्ञान के उत्सव का दिन है। इसी पावन अवसर पर Hello UP Family की ओर से सभी पाठकों, दर्शकों और डिजिटल परिवार को हार्दिक शुभकामनाएं। ज्ञान की देवी, उम्मीदों की खेती मां सरस्वती का यह दिन हमें याद दिलाता है कि शोर से ज़्यादा ज़रूरी है समझ, और भीड़ से ज़्यादा ताक़त होती है विवेक में। पीले रंग की मिठास और हवा में घुली उम्मीदें, बसंत को खास बना देती हैं। Keyboard से Classroom तक आज का बसंत…

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