CDS बोले: डिटरेंस हमारी—और यकीन दुश्मन को भी

चाणक्य डिफेंस डायलॉग के मंच से CDS जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ऐसा बयान दिया कि दुश्मन देश की कानों में alert tone बज उठी। उन्होंने कहा— “Deterrence तभी काम करती है जब Political Will हो, Military Muscle पर भरोसा हो और Capability हो… और हमारे पास तीनों हैं।”यानि सीधा-सीधा संकेत—“We mean business.” कश्मीर: ‘कौन-सा झंडा बनाऊँ?’ से ‘गलतफहमी खत्म’ तक का सफर धारा 370 हटने के बाद के बदलावों पर CDS ने बड़े आराम लेकिन ठोस टोन में कहा— पहले बच्चे खुद कंफ्यूज थे कि “आज कौन सा फ्लैग बनाना…

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किश्तवाड़ का कहर: मलबे में दबा मातम, हर चीख एक कहानी

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ ज़िले के चशोटी गांव में बादल फटने की विनाशकारी घटना को 24 घंटे बीत चुके हैं।एनडीआरएफ, सेना, पुलिस और स्थानीय प्रशासन लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन में लगे हुए हैं, लेकिन मलबे में अभी भी 200 से ज़्यादा लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है।अब तक 45 मौतों की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें से केवल 8-10 शवों की ही पहचान हो सकी है। रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, संसाधनों की भारी कमी एनडीआरएफ के एक अधिकारी के मुताबिक, “हमारे पास फिलहाल एक ही JCB मशीन है। जब…

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370 के बाद अब 360° कैंपेन – हर घर से उठेगी आवाज़

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 79वें स्वतंत्रता दिवस पर श्रीनगर के बख्शी स्टेडियम में दिए अपने भाषण के दौरान जनता से सीधा संवाद शुरू करने का ऐलान किया।उन्होंने कहा कि अगर केंद्र सरकार राज्य को फिर से राज्य का दर्जा नहीं देती, तो वे घर-घर जाकर सिग्नेचर कैंपेन शुरू करेंगे। “अब खत लिखने का वक्त नहीं, अब सीधे जनता से बात होगी। जब तक हमें हमारा हक नहीं मिलेगा, तब तक चुप नहीं बैठेंगे।” क्या है ये सिग्नेचर कैंपेन? उमर अब्दुल्ला ने बताया कि यह अभियान सिर्फ एक विरोध…

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“370 गया, विकास आया!” — कश्मीर बदल रहा है या बस प्रचार चल रहा है?

5 अगस्त 2019 को भारतीय संविधान से अनुच्छेद 370 हटाया गया था, जिसने जम्मू-कश्मीर को मिला विशेष दर्जा खत्म कर दिया। तब से लेकर आज तक, घाटी में बदलाव की कई परतें देखने को मिली हैं — कुछ ज़मीन पर और कुछ सियासत में। अनुच्छेद 370 क्या था? अनुच्छेद 370 जम्मू-कश्मीर को भारत में एक विशेष दर्जा देता था। यहां के लोग सिर्फ राज्य के स्थायी नागरिक ही माने जाते थे। दूसरे राज्यों के नागरिक यहां ज़मीन नहीं खरीद सकते थे। भारतीय संसद के सारे कानून सीधे लागू नहीं होते…

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