चहल्लुम (Chehlum) यानी इमाम हुसैन की शहादत का 40वां दिन, जो हर साल 20 या 21 सफर (इस्लामी महीना) को मनाया जाता है। इस दिन दुनिया भर के मुसलमान खासकर शिया समुदाय, इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की करबला में दी गई शहादत को याद करता है। करबला की जंग: हक बनाम ज़ुल्म इस्लाम के पैगम्बर मोहम्मद ﷺ के नवासे हजरत इमाम हुसैन ने 10 मुहर्रम को यज़ीद की सत्ता और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई। यज़ीद: एक ज़ालिम हाकिम जिसने खिलाफत को तानाशाही में बदल दिया था। हुसैन:…
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लखनऊ में ताबूत का जुलूस, आग का मातम और शरबत की सबीलें
लखनऊ के मदेयगंज खदरा क्षेत्र में मोहर्रम की 10वीं तारीख पर परंपरा के अनुसार ताबूत का जुलूस निकाला गया और मजलिस आयोजित की गई। इसमें बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। कर्बला की याद में गार वाली कर्बला पर ‘आग का मातम’ कर गहरा शोक व्यक्त किया गया। सबीलों की मिठास में बसी इंसानियत जुलूस के दौरान हर मोड़ पर शरबत और पानी की सबीलें लगाई गई थीं। जुलूस में शामिल हर व्यक्ति को ठंडा शरबत बांटा गया। यह केवल एक रस्म नहीं, बल्कि एकता और सेवा का जीवंत…
Read Moreलखनऊ की अजादारी: मोहर्रम की परंपरा, इतिहास और गंगा-जमुनी तहज़ीब का संगम
मोहर्रम का महीना सिर्फ शोक और इबादत का नहीं, बल्कि इतिहास, बहादुरी और इंसानियत की मिसाल है। पैगंबर मोहम्मद के नवासे हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत की याद में पूरी दुनिया में अजादारी होती है, लेकिन लखनऊ की अजादारी न सिर्फ धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक, साहित्यिक और सामाजिक परंपराओं की एक बेमिसाल मिसाल है। यहां के शाही जुलूस, मर्सिये, ताबूत और गंगा-जमुनी तहज़ीब इसे विश्वभर में खास बनाते हैं। 06 जुलाई की ब्रेकिंग न्यूज़: प्रतापगढ़ से लेकर अमेरिका तक की 10 बड़ी खबरें तीन शाही जुलूस: नवाबी दौर…
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