सरकार का “पावर कट”! मेडागास्कर में विरोध से फ्यूज उड़ा

मेडागास्कर, जहां पहले लोग बिजली और पानी को मिस कर रहे थे, अब वो सरकार को भी मिस करेंगे — या शायद नहीं। पिछले कई दिनों से सड़कों पर उतरे गुस्साए युवा, जो बिजली के बल्ब से ज़्यादा तेज़ चमक रहे थे, अब सरकार को ब्लैकआउट मोड में डाल चुके हैं। “माफ़ कीजिए, हमसे नहीं हो पाया” – राष्ट्रपति रजोएलिना सोमवार की शाम, राष्ट्रपति एंड्री रजोएलिना ने टीवी पर आकर बड़ी नम्रता से कहा: “अगर सरकार ने अपनी ज़िम्मेदारियां पूरी नहीं कीं, तो हम इसे स्वीकार करते हैं और माफ़ी मांगते…

Read More

महिलाओं की लिखी 140 किताबें “हराम”- ये काम सिर्फ तालिबान कर सकता

तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान के विश्वविद्यालयों में महिलाओं की लिखी किताबों को हटाने का आदेश जारी कर दिया है।जी हां, अब “सेफ़्टी इन द केमिकल लेबोरेटरी” जैसी वैज्ञानिक किताबें भी शरिया विरोधी मानी जा रही हैं। महिलाओं की लिखी 140 किताबें “हराम”? तालिबान का दावा है कि इन किताबों में मौजूद विचार “इस्लामी व्यवस्था के ख़िलाफ़ हैं”। 680 किताबों की बैन लिस्ट में करीब 140 ऐसी किताबें हैं जो महिलाओं ने लिखी हैं। अब लगता है कि कलम से खतरा है, किताबों से बगावत है। कौन-कौन से विषय हुए बैन? तालिबान ने…

Read More

ब्रिटेन में ‘फ़लस्तीन एक्शन’ पर बैन के विरोध में बवाल, 425 गिरफ़्तार

ब्रिटेन की राजधानी लंदन के संसद स्क्वायर में शनिवार को जो हुआ, वह सिर्फ़ एक विरोध प्रदर्शन नहीं था – वह एक राजनीतिक रिएक्शन था।‘फ़लस्तीन एक्शन’ नाम के कैंपेनिंग समूह पर बैन के विरोध में हुए इस प्रदर्शन में 425 से ज़्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया। उनके हाथों में तख़्तियां थीं, आवाज़ों में गुस्सा था, और नारों में – “हम चुप नहीं बैठेंगे” का ऐलान! पुलिस बनाम पब्लिक: कौन किसे कंट्रोल करेगा? मेट्रोपॉलिटन पुलिस के मुताबिक़: “गिरफ्तार किए गए लोगों में अधिकतर प्रतिबंधित संगठन ‘फ़लस्तीन एक्शन’ के समर्थक थे।”…

Read More

रूस-यूक्रेन युद्ध: ड्रोन हमले, एक की मौत और 28 घायल

रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध जारी है, और पिछले कुछ घंटों में ड्रोन हमले अधिक गंभीर हो गए हैं। रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने 86 ड्रोन (यूएवी) मार गिराए। इनमें से अधिकांश हमले काला सागर और दक्षिणी रोस्तॉव क्षेत्र में हुए। रूस के अधिकारियों ने बताया कि किसी प्रकार की गंभीर क्षति या हताहत की सूचना नहीं मिली है। हालांकि, ज़ापोरिज़िया और अन्य यूक्रेनी इलाकों में स्थिति काफी बिगड़ी हुई है। यूक्रेन के ज़ापोरिज़िया में हुआ बड़ा हमला यूक्रेन की इमरजेंसी…

Read More

जब दुनिया चुप है, इंडोनेशिया ने खोली इंसानियत की नई खिड़की

ग़ज़ा में हर दिन नई त्रासदी की तस्वीरें सामने आ रही हैं। वहीं, इंडोनेशिया ने कुछ अलग किया है — घायलों के लिए ‘इलाज मिशन’ की घोषणा कर दी है। राष्ट्रपति प्राबोवो सुबिअंतो के प्रवक्ता ने कहा कि ग़ज़ा के करीब 2000 घायलों का इलाज इंडोनेशिया करेगा। लेकिन ध्यान रहे, प्रवक्ता ने साफ कहा है: “यह निकासी नहीं है, यह केवल इलाज है। ठीक होने के बाद वे ग़ज़ा लौट जाएंगे।” यानी ‘मेहमान नवाज़ी’ का ड्यूरेशन है — इलाज पूरा, वापसी तय! गलांग द्वीप: इतिहास से वर्तमान तक का ‘ह्यूमेन…

Read More

निमिषा की फांसी टली, लेकिन यमन की जेल की कहानी रुला देगी

भारतीय मूल की नर्स निमिषा प्रिया की फांसी 16 जुलाई 2025 को होनी थी, लेकिन ऐन वक्त पर राहत की खबर आई — फिलहाल फांसी टाल दी गई है!पर क्या ये वक़्त केवल सजा टालने का है या सिस्टम को आईना दिखाने का? राजनीति का दिलेर, अब दिल की लड़ाई लड़ रहा है – दिनेश खटीक ICU में भर्ती सना सेंट्रल जेल: जहां इंसाफ नहीं, सिर्फ इंतज़ार मिलता है यमन की राजधानी सना में स्थित यह जेल सिर्फ एक कैदखाना नहीं, बल्कि मानवाधिकारों का कब्रिस्तान बन चुकी है।1993 में बनी…

Read More

ग़ज़ा में बच्चों की मौत और संयुक्त राष्ट्र की चुप्पी: मानवाधिकार सिर्फ टाइमपास?

बच्चों की चीखें, लेकिन संयुक्त राष्ट्र अब भी ‘मीटिंग मोड’ में! ग़ज़ा के अल-नुसेरत रिफ्यूजी कैंप में जब बच्चे पानी भरने गए और उन पर बम गिरा — 6 बच्चों समेत 10 लोग मारे गए।दुनिया की आंखें नम थीं, लेकिन संयुक्त राष्ट्र के प्रेस ऑफिस में शायद वीकेंड की छुट्टी थी। पानी भरने गए, ज़िंदगी गंवा बैठे: ग़ज़ा में 6 बच्चों की मौत मानवाधिकार आयोग की मानवता आउट ऑफ कवरेज UNHRC यानी मानवाधिकार का वो मठ, जहाँ अधिकारों की रक्षा सिर्फ काग़ज़ों और घोषणाओं में होती है।ग़ज़ा में बम स्कूलों पर…

Read More

जब ‘जय भीम’ सिर्फ़ नारा नहीं, इंकलाब बन गया

जब कोई कहता है “जय भीम”, तो वो सिर्फ़ एक अभिवादन नहीं करता — वो एक विचार, एक इतिहास और एक सामाजिक विद्रोह को सलाम करता है। इस दो शब्दों में छिपी है आज़ादी, समानता और न्याय की जंग। “जय भीम” का जन्म — सम्मान से उठी आवाज़ “जय भीम” नारे की शुरुआत 1940 के दशक में मानी जाती है। यह नारा डॉ. भीमराव अंबेडकर के अनुयायियों द्वारा उनके सम्मान में गढ़ा गया। शुरुआत में यह एक क्रांतिकारी अभिवादन था, जिसे दलित समाज के लोग आपसी मेलजोल और आत्मसम्मान के…

Read More

पाकिस्तान की जेलों में कैदियों की चीखें, सियासी सन्नाटा! कब मिलेगा इंसाफ?

हर साल आते हैं आंकड़े, मगर सवाल वही रहता है- भारत और पाकिस्तान के बीच 1 जनवरी और 1 जुलाई को कैदियों की सूची का आदान-प्रदान होता है। इस बार की लिस्ट ने एक बार फिर उस कड़वी सच्चाई को उजागर कर दिया है, जो हर भारतीय के दिल में गहरे उतर जाती है—246 भारतीय नागरिक पाकिस्तान की जेलों में बंद हैं, जिनमें से 159 ऐसे हैं जिन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली है। जब सब्ज़ी काटती हैं पत्नियाँ, तो मर्दों को कौन काटेगा? – मीम का मज़ेदार सच! 193 मछुआरे,…

Read More

भारत चाँद पर पहुँचा, पर दलितों को इंसान समझने से अब भी दूर!

भारत ने चाँद पर कदम रख दिए। वैज्ञानिकों की मेहनत और राष्ट्र का गौरव – हर जगह तारीफ़ हो रही है। लेकिन एक सवाल बार-बार कचोटता है – क्या यही वो देश है जहाँ अब भी किसी इंसान को सिर्फ उसकी जाति के आधार पर नीचा दिखाया जाता है? कोलकाता लॉ कॉलेज में छात्रा से गैंगरेप, आरोपी TMCP से जुड़ा पढ़े-लिखे समाज की चुप्पी क्यों? हम गर्व से कहते हैं कि हम “शिक्षित” हैं, आधुनिक हैं। लेकिन जब हमारे आस-पास दलितों को मंदिर में घुसने से रोका जाता है, शादी…

Read More