लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जल्द ही देश का पहला अत्याधुनिक संस्कृति संग्रहालय और रिचुअल सेंटर आकार लेने जा रहा है। यहां भारतीय जीवन दर्शन, सनातन परंपराओं, जनजातीय विरासत और जन्म से मोक्ष तक की सांस्कृतिक यात्रा को आधुनिक तकनीक के माध्यम से जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। खास बात यह है कि इस हाईटेक संग्रहालय में 3डी तकनीक के जरिए भारतीय जीवन के 16 संस्कारों का अनूठा अनुभव कराया जाएगा। बीकेटी स्थित चंद्रिकादेवी मंदिर के निकट लगभग 6 एकड़ भूमि पर उत्तर प्रदेश संस्कृति संग्रहालय-म्यूजियम…
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“अयोध्या में उड़ेंगे 1000 ड्रोन, रामायण दिखेगी आसमान में!”
उत्तर प्रदेश सरकार अयोध्या को फिर से इतिहास के सुनहरे पन्नों में दर्ज कराने जा रही है। इस बार दीपोत्सव 2025 में सिर्फ दीप ही नहीं, बल्कि आसमान में उड़ते 1,000 से अधिक मेड इन इंडिया ड्रोन भी होंगे, जो रामायण की झलकियों को थ्री-डी फॉर्मेट में जीवंत कर देंगे। 1000 ड्रोन से बनेगा ‘आसमान का रामायण’ पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार, इस वर्ष का एरियल ड्रोन शो पूरी दुनिया के सामने भारत की आध्यात्मिकता और तकनीकी ताकत का संगम साबित होगा।शो में राम, लक्ष्मण और हनुमान के धनुर्धारी…
Read Moreमां कसम लखनऊ तो बहुत घुमने गए होगे, लेकिन “तुर्किश गेटवे” नहीं देखा होगा
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ देश के प्रमुख ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों में एक खास मुकाम रखती है। अपनी नजाकत, तहजीब और बहुरंगी संस्कृति के लिए मशहूर यह शहर देश-विदेश के पर्यटकों को सदैव आकर्षित करता रहा है। गर्मियों की छुट्टियां बिताने के लिए लखनऊ एक बेहतरीन विकल्प है। सिर्फ’राजा भैया’ ही नहीं, एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत है प्रतापगढ़ नवाबी तहजीब और अद्भुत विरासत लखनऊ अपनी चिकनकारी कला, दशहरी आम के बागों, और बहुरंगी तहजीब के लिए विश्वप्रसिद्ध है। ऐतिहासिक अवध क्षेत्र में बसे इस शहर ने शिया नवाबों के…
Read Moreसिर्फ’राजा भैया’ ही नहीं, एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत है प्रतापगढ़
उत्तर प्रदेश का प्रतापगढ़ जिला पूर्व मंत्री राजा भैया की वजह से सुर्खियों में रहता है, लेकिन इस जिला की पहचान सिर्फ राजनीति या बाहुबली छवि से नहीं होनी चाहिए। प्रतापगढ़, जिसे स्थानीय लोग ‘बेल्हा’ भी कहते हैं, एक ऐसा ज़िला है जहाँ इतिहास, धर्म, साहित्य और स्वतंत्रता संग्राम की गूंज आज भी सुनाई देती है। प्रतापगढ़ का नाम राजा प्रताप बहादुर (1628–1682) के बनाए किले ‘प्रतापगढ़’ से पड़ा। जब 1858 में जिले का पुनर्गठन हुआ, तब इसका मुख्यालय बेल्हा में बना और तब से बेल्हा-प्रतापगढ़ के नाम से जाना जाने…
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