
Swami Avimukteshwaranand के खिलाफ दर्ज POCSO मामले में हालिया मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देते हुए अभियोजन पक्ष ने अदालत में अपनी दलीलें मजबूत होने का दावा किया है। रिपोर्ट में पीड़ितों की जांच के निष्कर्षों का उल्लेख है, जिन्हें कोर्ट रिकॉर्ड का हिस्सा बताया जा रहा है।
मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है और अगली सुनवाई पर सबकी निगाहें टिकी हैं।
‘गुरु दीक्षा’ के नाम पर आरोप
कुछ बच्चों ने विशेष साक्षात्कारों में आरोप लगाए हैं कि उन्हें ‘दीक्षा’ के नाम पर अलग कमरे में बुलाया जाता था। यह भी दावा किया गया कि अन्य राज्यों से आए कई नाबालिग वहां रहे।
जांच एजेंसियां इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि कर रही हैं। आधिकारिक रूप से कितने पीड़ित हैं और किन परिस्थितियों में घटनाएं हुईं यह अदालत की प्रक्रिया में स्पष्ट होगा।
मठ परिसर और ‘गुप्त कक्ष’
शिकायतों में परिसर के भीतर एक विशेष कमरे और वहां आने-जाने वाले प्रभावशाली लोगों का जिक्र किया गया है। इन दावों पर भी पुलिस साक्ष्य जुटा रही है।
ध्यान देने योग्य है कि अभी तक अदालत ने अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है; इसलिए सभी आरोप न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं।
शंकराचार्य का पक्ष
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोपों को खारिज करते हुए इसे साजिश बताया है। उनका कहना है कि जांच निष्पक्ष होनी चाहिए और वे कानून का सम्मान करते हैं।

उनकी ओर से यह भी प्रश्न उठाया गया है कि जांच प्रक्रिया में शिकायतकर्ता की भूमिका क्या रही। बचाव पक्ष का दावा है कि साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की आशंका है जिसकी सत्यता पर अदालत ही निर्णय देगी।
कानून की कसौटी पर आस्था
POCSO जैसे कड़े कानून में मेडिकल साक्ष्य अहम माने जाते हैं, लेकिन अंतिम निर्णय गवाहियों, क्रॉस-एग्ज़ामिनेशन और न्यायिक समीक्षा के बाद ही होता है।
यह मामला एक बड़े विमर्श को जन्म देता है क्या धार्मिक संस्थानों में जवाबदेही के मानक अलग हो सकते हैं? या कानून सबके लिए समान है?
‘भगवा’ या ‘काला-सफेद’ कानून?
आस्था रंगों में बंटी हो सकती है, पर कानून श्वेत-श्याम दस्तावेज़ों में चलता है। कोर्ट में भावनाएं नहीं, फाइलें बोलती हैं। इस केस ने यह याद दिलाया है कि श्रद्धा निजी हो सकती है, लेकिन आरोप सार्वजनिक होते ही वे न्याय की कसौटी पर आ जाते हैं।
अदालत की अगली सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि गिरफ्तारी, राहत या आगे की जांच किस दिशा में मामला बढ़ेगा। देश की निगाहें इस हाई-प्रोफाइल केस पर हैं, जहां धर्म, राजनीति और कानून एक ही फ्रेम में दिखाई दे रहे हैं।
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