AI से बनी याचिका, अदालत में हड़कंप! CJI बोले– ‘गूगल नहीं, दिमाग लगाइए’

गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

देश की सर्वोच्च अदालत Supreme Court of India में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश CJI सूर्यकांत ने साफ शब्दों में कहा कि कुछ वकील AI टूल्स की मदद से याचिकाएं तैयार कर रहे हैं लेकिन उनमें गलत, अधूरी और यहां तक कि काल्पनिक केस लॉ भी शामिल हो रहे हैं।

कोर्ट के अनुसार कई मामलों में ऐसे फैसलों का हवाला दिया गया जो वास्तविकता में मौजूद ही नहीं हैं। इससे न सिर्फ अदालत का कीमती समय बर्बाद होता है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठते हैं।

‘AI रिसर्च असिस्टेंट है, जज नहीं’

सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ वकील बिना तथ्य जांचे सीधे AI से तैयार ड्राफ्ट कोर्ट में दाखिल कर रहे हैं। इस पर नाराजगी जताते हुए अदालत ने कहा कि तकनीक मददगार हो सकती है, लेकिन वकील की जिम्मेदारी का विकल्प नहीं बन सकती।

CJI ने स्पष्ट किया कि AI में मानवीय विवेक, संवेदना और परिस्थितियों की समझ नहीं होती। न्याय सिर्फ कानून की धाराओं से नहीं, बल्कि अनुभव और नैतिक समझ से भी संचालित होता है और यह गुण किसी मशीन में नहीं हो सकता।

“कॉपी-पेस्ट से केस नहीं जीतते, कोर्ट में दलीलें भी देनी पड़ती हैं।”

फर्जी केस लॉ पर सख्त रुख

कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में AI-जनित गलत या काल्पनिक याचिकाएं सामने आती रहीं, तो सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।हालांकि, अदालत ने यह भी स्वीकार किया कि रिसर्च, पुराने फैसलों की खोज और दस्तावेज प्रबंधन में AI उपयोगी साबित हो सकता है। लेकिन अंतिम ड्राफ्ट, तर्क और तथ्य प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी पूरी तरह वकीलों की ही होगी।

टेक्नोलॉजी बनाम जिम्मेदारी

भारत की न्याय प्रणाली डिजिटल ट्रांजिशन के दौर से गुजर रही है। ई-कोर्ट्स, ऑनलाइन फाइलिंग और डिजिटल रिकॉर्ड मैनेजमेंट ने प्रक्रिया को तेज किया है। ऐसे में AI का प्रवेश स्वाभाविक है, लेकिन सवाल संतुलन का है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि AI को “सहायक उपकरण” की तरह इस्तेमाल किया जाना चाहिए, न कि “तर्क का स्रोत” मान लिया जाए।

न्याय व्यवस्था के लिए बड़ा संकेत

यह टिप्पणी सिर्फ एक चेतावनी नहीं, बल्कि पूरे लीगल इकोसिस्टम के लिए संदेश है—टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल जिम्मेदारी के साथ करें। क्योंकि अंततः न्यायालय में पेश होने वाली हर दलील के पीछे एक इंसान की जवाबदेही होती है, न कि किसी एल्गोरिदम की।

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