
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) एक बार फिर देश की राजनीति के केंद्र में आ गया है। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता Sonia Gandhi ने मनरेगा में किए गए हालिया बदलावों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उनका कहना साफ है—जो योजना कभी ग्रामीण भारत की life-line थी, आज उसे धीरे-धीरे कमजोर किया जा रहा है।
सोनिया गांधी के बयान ने साफ कर दिया है कि यह सिर्फ एक policy debate नहीं, बल्कि rights vs power की सीधी लड़ाई बन चुकी है।
“20 Years Ago, Parliament Spoke in One Voice”
Sonia Gandhi ने याद दिलाया कि लगभग 20 साल पहले, जब Dr. Manmohan Singh प्रधानमंत्री थे, तब संसद ने सर्वसम्मति से मनरेगा कानून को पास किया था।
उनके मुताबिक, यह कानून किसी पार्टी का एजेंडा नहीं था, बल्कि national consensus का नतीजा था।
थोड़े सियासी तंज के साथ उन्होंने कहा— “तब संसद ने गरीबों के लिए सोचा था, आज फाइलों में फैसले लिए जा रहे हैं।”
Gram Panchayats Empowered, Not Just Employment
सोनिया गांधी ने जोर देकर कहा कि MGNREGA सिर्फ रोजगार योजना नहीं थी।
यह— Gram Panchayats को power देने का tool,Migration रोकने का shield और Gandhiji के Gram Swaraj vision को जमीन पर उतारने का जरिया थी।
उनका कहना था कि गांव को मजबूत किए बिना देश मजबूत नहीं हो सकता—और मनरेगा ने यही काम किया।
“Bulldozer Politics Hits MGNREGA” 🚜
सबसे तीखा हमला तब देखने को मिला जब Sonia Gandhi ने कहा— “Modi Government ने मनरेगा पर बुलडोजर चला दिया है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि—बिना व्यापक चर्चा, बिना विपक्ष को विश्वास में लिए और बिना ground reality समझे मनरेगा के स्वरूप में बदलाव कर दिए गए।
नाम बदलना हो या नियमों में कटौती—सब कुछ top-down decision making का उदाहरण बताया गया। यहां सियासी संदेश साफ था—policy से ज्यादा perception manage किया जा रहा है।

Legal Right to Work: A Historic Shift
Sonia Gandhi ने कहा कि मनरेगा ने पहली बार ग्रामीण भारत को Legal Right to Employment दिया।
यह charity नहीं थी, यह right-based law था।
उन्होंने कहा कि— गरीब मजदूर को dignity मिली। गांव में spending power आई और मजबूरी में शहरों की ओर पलायन कम हुआ। आज अगर इस कानून को कमजोर किया जा रहा है, तो इसका असर सिर्फ आंकड़ों पर नहीं, बल्कि ज़मीन पर ज़िंदगियों पर पड़ेगा।
Congress vs BJP: Policy या Politics?
Sonia Gandhi ने यह भी साफ किया कि मनरेगा कांग्रेस की private property नहीं है।
लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि—“जो योजना करोड़ों किसानों, मजदूरों और भूमिहीनों के हक की थी, उसे कमजोर करना सीधे-सीधे गरीब विरोधी सोच को दर्शाता है।”
यह बयान सीधे तौर पर BJP सरकार की economic priorities पर सवाल खड़ा करता है।
MGNREGA अब सिर्फ एक welfare scheme नहीं रहा।
यह— Rural votes, Social justice और 2024 के बाद की political narrative का बड़ा मुद्दा बन चुका है।
Sonia Gandhi के इस बयान से साफ है कि कांग्रेस ग्रामीण भारत को केंद्र में रखकर सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है—और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गर्माने वाला है।
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