
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को सोमनाथ मंदिर में आयोजित सोमनाथ स्वाभिमान पर्व 2026 में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने 108 अश्वों की शौर्य यात्रा में शामिल होकर उन वीर योद्धाओं को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने सोमनाथ मंदिर की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी।
समुद्र की लहरें और महादेव का आशीर्वाद
पीएम मोदी ने कहा, “मैं अपना सौभाग्य मानता हूँ कि मुझे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में सेवा का अवसर मिला। यह समय और वातावरण अद्भुत है, महादेव और समुद्र की लहरें मिलकर एक अद्वितीय अनुभव बना रहे हैं।”
इस दौरान 72 घंटे तक अनवरत ओंकार नाद और मंत्रोच्चार का वातावरण और भी दिव्य बन गया।
1000 ड्रोन में 1000 साल की गाथा
प्रधानमंत्री ने 1000 ड्रोन द्वारा सोमनाथ के 1000 वर्षों की कहानी को भी सराहा। उन्होंने कहा, “यह सब मंत्र-मुग्ध कर देने वाला है और इसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है।”
इतिहास की गाथा: गजनी से औरंगजेब तक
पीएम मोदी ने सोमनाथ पर महामूद गजनी के 1026 ईस्वी में हुए पहले हमले का जिक्र करते हुए कहा, “हजार साल पहले हमारे पूर्वजों ने आस्था और विश्वास के लिए अपने प्राणों की बाजी लगाई। गजनी और औरंगजेब इतिहास के पन्नों में दफन हो गए, लेकिन सोमनाथ मंदिर आज भी गर्व से खड़ा है।”

विजय और पुनर्निर्माण का प्रतीक
उन्होंने कहा कि सोमनाथ का इतिहास विनाश का नहीं, बल्कि विजय और पुनर्निर्माण का है। महादेव का नाम मृत्युंजय है, जिसने मृत्यु को भी जीत लिया। पीएम मोदी ने सोमनाथ के पुनर्निर्माण के 75 वर्षों की भी प्रशंसा की और इसे भारत की अस्तित्व और अभिमान का पर्व बताया।
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