
कभी Middle East और Africa में अपनी मजबूत पकड़ के लिए पहचाना जाने वाला United Arab Emirates (UAE) अब लगातार diplomatic setbacks से जूझता नजर आ रहा है।
पहले यमन से आई बुरी खबर ने अबू धाबी की रणनीति पर सवाल खड़े किए और अब सोमालिया के अचानक फैसले ने हालात और मुश्किल बना दिए हैं।
इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है— क्या UAE की regional strategy में कोई बड़ा miscalculation हो गया है?
Somalia का बड़ा फैसला: UAE के साथ सभी समझौते रद्द
सोमालिया सरकार ने यूएई के साथ किए गए सभी प्रमुख समझौतों को रद्द करने का ऐलान कर दिया है।
इनमें शामिल हैं:
- Port operations
- Security cooperation
- Defence-related agreements
सोमालिया की मंत्रिपरिषद के फैसले की घोषणा होते ही diplomatic circles में हलचल मच गई।
Sovereignty First: Somalia का सख्त संदेश
सोमालिया के रक्षा मंत्री अहमद मुअल्लिम फिकी ने साफ कहा कि यह फैसला “ठोस रिपोर्टों और सबूतों के आधार पर” लिया गया है। उनके अनुसार, कुछ गतिविधियों के संकेत मिले थे जो Somalia की sovereignty, national unity, political इंडिपेंडेंस को नुकसान पहुंचा रही थीं।
जब मेहमान ज़्यादा ही घर बसाने लगे, तो मेज़बान दरवाज़ा बंद कर देता है।
Behind the Decision: Somaliland Angle
विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले की जड़ें दिसंबर में हुए एक अहम घटनाक्रम से जुड़ी हैं, जब Israel द्वारा Somaliland को मान्यता देने की चर्चाएं तेज हुईं।
Somaliland, जो 1991 से खुद को अलग देश घोषित करता रहा है, अब तक अंतरराष्ट्रीय मान्यता से वंचित है।

सोमाली विश्लेषक अब्दिनोर दाहिर के मुताबिक, देश में यह धारणा मजबूत है कि इस प्रक्रिया के पीछे UAE की भूमिका रही है। और यही वजह है कि सरकार का यह कदम Abu Dhabi को दिया गया clear political message माना जा रहा है।
Somaliland–UAE Closeness बनी चिंता की वजह
पिछले एक दशक में Somaliland, UAE के लिए trade और security investment hub बन चुका था।
सबसे बड़ा उदाहरण— Berbera Port का 30 साल का ठेका। UAE की कंपनी DP World को संचालन अधिकार, यही नजदीकी अब Somalia सरकार की सबसे बड़ी चिंता बन गई है।
Yemen के बाद दूसरा बड़ा झटका
यह घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया है जब Yemen में UAE समर्थित Southern Transitional Council को पीछे हटना पड़ा है।
Somalia ने इसी network से जुड़े कुछ नेताओं की गतिविधियों को लेकर अपने airspace के दुरुपयोग की जांच भी शुरू की है।
Big Picture: UAE की Foreign Policy Under Scanner
इन लगातार घटनाओं ने साफ संकेत दे दिया है कि UAE के लिए Africa और Arab world में रास्ता अब पहले जैसा आसान नहीं रहा। जहां कभी Abu Dhabi को Smart डिप्लोमेसी, Strategic investments के लिए सराहा जाता था, वहीं अब उसकी foreign policy decisions scrutiny में हैं।
What Next for Abu Dhabi?
आने वाले दिनों में सबकी नजर इस पर होगी कि UAE इन बढ़ती चुनौतियों से कैसे निपटता है। क्या strategy reset होगा या damage control क्योंकि geopolitics में एक नियम तय है— Permanent friends नहीं होते, permanent interests होते हैं।
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