
भारत-पाकिस्तान के बीच POK को लेकर विवाद कोई नई कहानी नहीं है और भारत-चीन के बीच लद्दाख को लेकर तनातनी अब रोज़मर्रा की हेडलाइन बन चुकी है। लेकिन इन दोनों तनावों के बीच Shaksgam Valley एक ऐसा इलाका है, जो quietly strategic bomb बनकर उभरा है। यह घाटी Jammu & Kashmir का हिस्सा मानी जाती है, जिस पर पहले Pakistan ने कब्जा किया और बाद में इसे China को सौंप दिया गया। भारत की नजर में यह एक नहीं, बल्कि दोहरी अवैधता का मामला है।
Shaksgam Valley फिर सुर्खियों में क्यों?
ताज़ा विवाद की वजह है China-Pakistan के बीच बन रहा एक नया corridor road project। China का दावा है कि वह अपनी जमीन में infrastructure develop कर रहा है, जो आगे चलकर Pakistan से connect होगा। लेकिन twist यहीं है। यह सड़क POK के Gilgit-Baltistan से होकर गुजरती है, जिसे भारत अपना territory मानता है।
यानि China की road engineering, Pakistan की geography और India की sovereignty एक ही जगह टकरा रही हैं। और भारत के लिए यह development नहीं, strategic provocation है।
CPEC: Economic Corridor या Strategic Shortcut?
China के Foreign Ministry के मुताबिक, 1960 में China और Pakistan के बीच एक agreement हुआ था, जिसके तहत Shaksgam Valley से जुड़ी सीमाएं तय की गईं। इसी समझौते से निकला China-Pakistan Economic Corridor (CPEC) — President Xi Jinping का flagship dream project।
Official version कहता है कि यह project trade, connectivity और regional development के लिए है। Unofficial reality यह है कि CPEC एक economic highway से ज्यादा geopolitical expressway बन चुका है।
Gwadar से Indian Ocean तक: व्यापार की आड़ में ताकत की एंट्री
CPEC के जरिए China को Arab Sea और Indian Ocean तक direct access मिल जाता है। Malacca Strait से आने वाला crude oil route जहां पहले 16,000 km लंबा था, अब घटकर करीब 5,000 km रह जाता है।
Gwadar Port पर Chinese naval presence पहले से है। Corridor बनने के बाद repair, maintenance और logistics support आसान हो जाएंगे। यानी container के साथ-साथ warships की सुविधा भी packed। व्यापार के नाम पर power projection, और दुनिया से अपेक्षा कि इसे सिर्फ economics समझा जाए।
India का स्टैंड: No Corridor on Our Map
भारत ने इस पूरे प्रोजेक्ट पर साफ-साफ No Recognition Policy अपनाई है। विदेश मंत्रालय ने दोहराया है कि Shaksgam Valley भारत का हिस्सा है और China का वहां presence illegal है।
India का तर्क सीधा है — कोई भी project जो Indian territory से गुजरता है, उसे legitimate नहीं माना जा सकता। खासकर तब, जब उस project का strategic design भारत को north और west दोनों तरफ से squeeze करता हो।

China का जवाब: नक्शा हमारा, सवाल आपका
China का रुख हमेशा की तरह diplomatic but firm है। Beijing का कहना है कि उसे अपने territory में infrastructure बनाने का पूरा अधिकार है और इसका India-Pakistan Kashmir dispute से कोई संबंध नहीं है।
मतलब साफ है — हम सड़क बनाएंगे, आप बयान जारी करेंगे।
China यह भी कहता है कि POK का मुद्दा India और Pakistan को बातचीत से सुलझाना चाहिए, जबकि खुद उसी इलाके से गुजरते corridor पर bulldozer चलता रहता है।
घाटी छोटी, खेल बड़ा
Shaksgam Valley दिखने में भले ही एक remote, icy stretch हो, लेकिन geopolitical terms में यह pressure point है। यहां China की ambition, Pakistan की dependency और India की sovereignty आमने-सामने खड़ी हैं।
यह विवाद सिर्फ जमीन का नहीं है, बल्कि narrative, navigation और national security का है। आने वाले वक्त में यह घाटी नक्शों से ज्यादा diplomatic dossiers में दिखाई देगी।
क्योंकि यहां सड़कें सिर्फ पहाड़ नहीं काट रहीं, विश्व राजनीति की दिशा भी तय कर रही हैं।
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