
भारत की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव आने के संकेत मिल रहे हैं। इस बार कहानी दिल्ली से नहीं, बल्कि पुडुचेरी से शुरू हो रही है—जहां एक नई राजनीतिक पार्टी का आगाज होने जा रहा है।
भारत में पार्टियों का आना कोई नई बात नहीं है। नई पार्टी बनती है, पोस्टर लगते हैं, प्रेस कॉन्फ्रेंस होती है—और फिर ज़्यादातर पार्टियां फंडिंग की कमी में दम तोड़ देती हैं। लेकिन इस बार मामला अलग है।
जब पार्टी के पास पैसा पहले से हो
यह नई पार्टी ‘लॉटरी किंग’ सैंटियागो मार्टिन लॉन्च करने जा रहे हैं। वही सैंटियागो मार्टिन जिनका नाम देश में सबसे ज्यादा Electoral Bonds खरीदने वाले बिजनेसमैन में सामने आया था।
इस पार्टी को खास बनाता है इसका आइडियोलॉजी नहीं, बल्कि इसका Financial Muscle।
राजनीति में विचार ज़रूरी हैं, लेकिन चुनाव जीतने के लिए आज भी सबसे पहले पूछा जाता है— “पैसा कितना है?”
बेटे के लिए पार्टी, लेकिन असर पूरे सिस्टम पर
सैंटियागो मार्टिन यह पार्टी अपने बेटे जोस चार्ल्स मार्टिन के लिए लॉन्च कर रहे हैं। पार्टी के पास अगर पर्याप्त और स्थायी फंडिंग रही, तो यह सिर्फ पुडुचेरी तक सीमित नहीं रहेगी। Self-funded पार्टी Corporate donations पर निर्भर नहीं और चुनावी खर्च की कोई कमी नहीं।
ऐसी पार्टी किसी भी चुनाव का गणित बिगाड़ सकती है।
Electoral Bonds: जहां से कहानी पलटी
1 अप्रैल 2019 से 15 फरवरी 2024 के बीच देश में ₹12,155 करोड़ से ज्यादा के Electoral Bonds खरीदे गए। इस लिस्ट में जिन कंपनियों के नाम सामने आए:
- Megha Engineering
- Qwik Supply Chain
- Future Gaming & Hotel Services
- Haldia Energy
- Dhariwal Infrastructure
और इसी लिस्ट में सबसे चर्चित नाम रहा—Santiago Martin।
किसे लगेगा सबसे बड़ा झटका?
रिपोर्ट्स के मुताबिक:

Santiago Martin की कंपनी ने
- TMC को ₹542 करोड़
- DMK को ₹503 करोड़
- YSR Congress को ₹154 करोड़
- BJP को ₹100 करोड़
अब सवाल यह है—अगर दान देने वाला खुद पार्टी बना ले, तो पुरानी पार्टियों का फंडिंग मॉडल क्या होगा?
यानी खतरा विपक्ष का नहीं, अपने पुराने समर्थक के मैदान में उतरने का है।
कौन हैं सैंटियागो मार्टिन? संघर्ष से साम्राज्य तक
सैंटियागो मार्टिन की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। जन्म: 1961, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह। कम उम्र में म्यांमार में दिहाड़ी मजदूर। 1980 के दशक में भारत वापसी। तमिलनाडु में चाय की दुकान से शुरुआत। लॉटरी की लोकप्रियता को समझते हुए कोयंबटूर में पहली दुकान खोली। कुछ ही वर्षों में तमिलनाडु के सबसे बड़े लॉटरी डीलर बने। 2001 में उन्होंने बताया था हम रोज़ 12 मिलियन लॉटरी टिकट बेचते हैं।”
यहीं से बना Future Gaming & Hotel Services का साम्राज्य।
अब राजनीति भी Jackpot सिस्टम पर?
अब तक राजनीति में नेता जनता से वोट मांगते थे और बिजनेसमैन पार्टियों को फंड देते थे। अब तस्वीर बदल रही है— बिजनेसमैन खुद कह रहा है “Party मेरी, Funding मेरी, Agenda भी मेरा।”
यानी Jackpot अब सिर्फ Lottery में नहीं, Politics में भी।
सैंटियागो मार्टिन की पार्टी सिर्फ एक नई राजनीतिक इकाई नहीं बल्कि भारत के चुनावी फंडिंग सिस्टम के लिए Stress Test है। अगर यह प्रयोग सफल रहा, तो आने वाले समय में राजनीति में विचारधारा से पहले Balance Sheet देखी जाएगी।
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