
वॉशिंगटन डीसी और दक्षिण ब्लॉक के बीच जो “टैरिफ तकरार” चल रही है, उस पर अब भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अमेरिका को ऐसा जवाब दिया है, जिसे अंग्रेज़ी में कहें तो – “साल्ट एंड पेपर विद टच ऑफ मिर्ची!”
“तेल नहीं चाहिए? कोई ज़बरदस्ती थोड़ी है!”
इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम 2025 में बोलते हुए जयशंकर बोले:
“अगर आपको भारत से तेल या अन्य उत्पाद खरीदने में कोई समस्या है तो न खरीदें। कोई आपको मजबूर नहीं कर रहा। यूरोप भी खरीद रहा है। अमेरिका भी।”
ट्रंप के 50% टैरिफ के जवाब में भारत ने डाक सेवाएं सस्पेंड कीं – और जयशंकर ने माइक्रोफोन से साफ कर दिया:
“ये व्यापार है, Tinder नहीं कि मैच जबरदस्ती हो।”
ट्रंप की ‘नॉन-ट्रेडिशनल’ विदेश नीति पर कटाक्ष
जयशंकर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर कहा:
“ऐसा कोई राष्ट्रपति नहीं रहा, जिसने विदेश नीति को इतने public और dramatic तरीके से चलाया हो। अपने देश से भी ऐसे व्यवहार करना नया ट्रेंड है।”
और सबसे पते की बात:
“चीन पर टैरिफ क्यों नहीं लगाया?”
हाँ भाई, सवाल तो बनता है।
हमारे किसान, हमारी प्राथमिकता
भारत ने साफ किया — ट्रेड की बात हो या टैरिफ की, किसानों के हित में समझौता नहीं होगा।
“हम अपने किसानों और छोटे उत्पादकों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। अगर किसी को दिक्कत है तो भारत की जनता को बताएं कि आप उनके किसानों के साथ नहीं हैं।”
जयशंकर ने अमेरिका को “मिडिल क्लास से ज़्यादा मिडिल फिंगर डिप्लोमेसी” में जवाब दिया – साफ, तीखा, और देसी अंदाज़ में।
भारत-पाकिस्तान मध्यस्थता पर फिर वही स्पष्टता
“50 साल से हमारी नीति है — पाकिस्तान के साथ किसी तीसरे की दखलंदाज़ी नहीं चाहिए। यह हमारी राष्ट्रीय सहमति है।”
यानि अमेरिका हो या रूस, दिल्ली के दरवाज़े बंद नहीं हैं, लेकिन कमरे में घुसने के नियम अपने हैं।
डिप्लोमेसी में देसीपना
डॉ. एस. जयशंकर ने फिर साबित किया कि भारत अब केवल “Non-Aligned” नहीं, बल्कि “Well Defined” नीति पर चलता है।
चाहे बात टैरिफ की हो, तेल की हो या ट्रंप की — देसी जवाब सीधा दिल पर लगता है।
“डाक अमेरिका भेजना बंद! अब लव लेटर और $100 के तोहफे ही उड़ पाएंगे”

