
मध्य प्रदेश के रीवा में एक युवक की 12 इंच पुरानी चोटी काटने की घटना अब सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं रही—यह Indian politics का नया flashpoint बन चुकी है। पीड़ित रोहित यादव के साथ दीपक पांडे द्वारा की गई मारपीट, गाली-गलौच और सार्वजनिक अपमान ने social media से लेकर political corridors तक हलचल मचा दी है।
‘BJP Kisi Ki Sagi Nahi’ – Akhilesh Yadav का सियासी हमला
Samajwadi Party chief और UP के पूर्व मुख्यमंत्री Akhilesh Yadav ने इस घटना को लेकर BJP governments पर सीधा और सधा हुआ वार किया। X (formerly Twitter) पर उन्होंने लिखा कि “जहां-जहां BJP की सरकारें हैं, वहां समाज में ऐसा जहरीला माहौल बनाया जा रहा है कि लोग अपनों के खिलाफ खड़े हो रहे हैं।”
साफ संदेश था—भीड़ के जोश में मत बहिए, क्योंकि जब कानून अपना काम करेगा, तब कोई सियासी झंडा ढाल नहीं बनेगा।
Nationalism vs ‘Rashtravivad’ – शब्दों का सर्जिकल स्ट्राइक
Akhilesh Yadav ने BJP के राष्ट्रवाद narrative पर सवाल उठाते हुए एक नया शब्द उछाल दिया—‘Rashtravivadi’। उनका तर्क blunt था, जो लोग समाज में डर, भेद और द्वेष बोते हैं, वे nation builders नहीं, बल्कि division managers हैं।
यह बयान soft नहीं था, लेकिन politically precise जरूर था।
Power Politics और Controlled Chaos
SP chief के अनुसार, सत्ता में बैठे कुछ लोग social तनाव को fuel बनाकर अपनी political कुर्सी warm रखते हैं। ऊंच-नीच, पहचान और अपमान—ये सब accidental नहीं, बल्कि designed distractions हैं।

देश आगे बढ़े या न बढ़े, polarization must remain in profit।
Peace Appeal with Sharp Undertone
रीवा केस पर अखिलेश ने emotional yet calculated appeal की। उन्होंने आरोपी से पश्चाताप और माफी की उम्मीद जताते हुए कहा— “नफरत सबसे पहले नफरत करने वाले को ही जलाती है।”
उनका closing note moral था, लेकिन political भी— “अच्छा इंसान बनिए, वही सच्चा राष्ट्रवाद है।”
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