
बॉलीवुड के इतिहास में कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जो बनते समय साम्राज्य जैसी लगती हैं, लेकिन रिलीज होते ही रेत के महल साबित होती हैं. 1983 में आई फिल्म Raziyya Sultan भी कुछ ऐसी ही कहानी है. भव्य सेट, शायरी से भरे संवाद और बड़े सितारे होने के बावजूद यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर टिक नहीं पाई. लेकिन आज भी इसे हिंदी सिनेमा की सबसे महत्वाकांक्षी फिल्मों में गिना जाता है.
इतिहास की पहली महिला सुल्तान पर बनी फिल्म
फिल्म की कहानी दिल्ली सल्तनत की पहली और इकलौती महिला शासक Razia Sultan के जीवन से प्रेरित है. कहानी उनके शासन, राजनीतिक संघर्ष और एक अबीसीनियाई गुलाम जमाल-उद-दीन याकूत के साथ उनके रिश्ते के इर्द-गिर्द घूमती है.
फिल्म में Hema Malini ने रज़िया का किरदार निभाया जबकि Dharmendra याकूत के रोल में नजर आए.
कमल अमरोही का ड्रीम प्रोजेक्ट
यह फिल्म मशहूर निर्देशक Kamal Amrohi का ड्रीम प्रोजेक्ट थी. बताया जाता है कि इसे बनाने में सात साल से ज्यादा समय लगा. उस दौर में इसका बजट करीब 7 से 10 करोड़ रुपये था. 1980 के दशक के हिसाब से यह रकम बेहद बड़ी मानी जाती थी. भव्य सेट, भारी कॉस्ट्यूम और शाही लोकेशनों ने फिल्म को विजुअल तौर पर शानदार बना दिया.
शानदार संगीत लेकिन कमर्शियल झटका
फिल्म का संगीत महान संगीतकार Khayyam ने तैयार किया था. गीतों में उर्दू शायरी की खूबसूरती साफ दिखाई देती है. “ऐ दिल-ए-नादान” जैसे गीत आज भी क्लासिक माने जाते हैं जिन्हें Lata Mangeshkar ने आवाज दी थी.

संगीत और कला निर्देशन की खूब तारीफ हुई. फिल्म को फिल्मफेयर में सर्वश्रेष्ठ कला निर्देशन का पुरस्कार भी मिला.
फिर भी क्यों फ्लॉप हुई फिल्म
इतनी भव्यता के बावजूद फिल्म बॉक्स ऑफिस पर टिक नहीं पाई. मुख्य वजहें मानी गईं भारी-भरकम संवाद और धीमी कहानी। आम दर्शकों के लिए कठिन उर्दू भाषा। लंबा रनटाइम रिलीज के बाद फिल्म मुश्किल से करीब 2 करोड़ रुपये ही कमा पाई.
आज क्यों बन चुकी है कल्ट क्लासिक
दिलचस्प बात यह है कि जो फिल्म रिलीज के समय असफल मानी गई, वही बाद में फिल्म प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बन गई. इसे
भव्य सेट डिजाइन क्लासिकल संगीत और ऐतिहासिक महत्व की वजह से हिंदी सिनेमा की अनोखी फिल्मों में गिनते हैं. यानी बॉक्स ऑफिस भले हार गया हो, लेकिन फिल्म की शाही महत्वाकांक्षा आज भी याद की जाती है.
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