
पुणे नगर निगम चुनाव से पहले राजनीति और अपराध का खतरनाक मेल एक बार फिर सामने आया है। पोते की हत्या के मामले में सजा काट रहे कुख्यात गैंगस्टर बंडू आंडेकर ने स्थानीय निकाय चुनाव के लिए निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल किया।
शुक्रवार को स्पेशल मकोका कोर्ट की अनुमति के बाद आंडेकर को येरवडा सेंट्रल जेल से पुलिस वैन में भवानी पेठ स्थित नामांकन केंद्र लाया गया।
चेहरा काले कपड़े से ढका, हाथ रस्सी से बंधे
जब बंडू आंडेकर पुलिस वैन से उतरे, तो उनका चेहरा काले कपड़े से ढका हुआ था और दोनों हाथ रस्सी से बंधे थे। इसके बावजूद सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि उन्होंने खुद के समर्थन में नारे भी लगाए।
यह दृश्य न सिर्फ कानून-व्यवस्था बल्कि लोकतंत्र की छवि पर भी कई सवाल खड़े करता है।
Nomination अधूरा, सोमवार को फिर मौका
चुनाव अधिकारियों के अनुसार, आंडेकर का नामांकन फॉर्म तकनीकी रूप से अधूरा पाया गया, इसलिए उसे फिलहाल स्वीकार नहीं किया गया है।
अब उन्हें सोमवार को दोबारा नामांकन दाखिल करना होगा।
Family Politics: भाभी और बहू भी मैदान में
अदालत की इजाजत के बाद आंडेकर परिवार के अन्य आरोपी सदस्यों ने भी पर्चा भरा है—
- लक्ष्मी आंडेकर (भाभी)
- सोनाली आंडेकर (बहू)
दोनों ही पोते आयुष आंडेकर की हत्या के मामले में आरोपी हैं और सजा काट रही हैं।

क्या है पूरा Murder Chain Case?
5 सितंबर को पुणे के नाना पेठ इलाके में आयुष आंडेकर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। आयुष, गणेश कोमकर का बेटा था—जो पहले से एक अन्य मर्डर केस में आरोपी है।
गणेश कोमकर पर NCP के पूर्व नगरसेवक और बंडू आंडेकर के बेटे वनराज आंडेकर की हत्या का आरोप है। यह मामला आपसी रंजिश, गैंगवार और सियासी कनेक्शन की कई परतें समेटे हुए है।
15 जनवरी को वोटिंग
महाराष्ट्र की 28 महानगरपालिकाओं के लिए 15 जनवरी को मतदान होना है। ऐसे में जेल में बंद आरोपियों का चुनावी मैदान में उतरना एक बार फिर Crime vs Democracy की बहस को तेज कर रहा है।
भारत में अब सवाल यह नहीं कि “अपराधी राजनीति में क्यों आते हैं?” बल्कि सवाल यह है— राजनीति उन्हें रोक क्यों नहीं पाती?”
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