
पाकिस्तान और UAE के रिश्तों को लेकर इस हफ्ते कूटनीति से ज़्यादा कयास चर्चा में रहे। 26 दिसंबर को UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के एकदिवसीय पाकिस्तान दौरे के दौरान अचानक heavy cargo aircrafts की आवाजाही ने सबका ध्यान खींच लिया।
ओपन सोर्स फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, UAE से पाकिस्तान के लिए C-17 Globemaster, An-124 और IL-76 जैसे विशाल कार्गो जेट्स उड़ान भरते देखे गए।
Investment या कुछ और?
आधिकारिक तौर पर UAE और पाकिस्तान इसे investment & political partnership बता रहे हैं।
लेकिन ज़मीनी हकीकत:
- कार्गो प्लेन्स
- Remote airstrips
- Desert landings
कहानी कुछ और इशारा करती है।
प्रेस रिलीज़ में “निवेश”, रनवे पर “कार्गो”।
कौन से ‘सीक्रेट प्लेन’ पाकिस्तान पहुंचे?
UAE राष्ट्रपति का स्वागत:
- नूर खान एयरबेस
- 21 तोपों की सलामी
- PM शहबाज़ शरीफ और Army Chief आसिम मुनीर मौजूद
लेकिन असली चर्चा में रहे:
- C-17 Globemaster (military logistics king)
- An-124 (दुनिया के सबसे बड़े cargo aircraft में से एक)
- IL-76 (heavy military transport)
इन विमानों को सिंध के अंदरूनी इलाकों और दक्षिणी पंजाब के चोलिस्तान रेगिस्तान के पास लैंड कराया गया — जहां आमतौर पर VIP private flights या rare operations होते हैं।
Cargo में क्या था?
सूत्रों के अनुसार, इन विमानों से लाया गया:

- Luxury mobile camps
- All-Terrain Vehicles (ATVs)
- Trained falcons (बाज़)
- Hunting equipment
यानी — royal desert setup पूरा पैकेज।
Houbara Bustard Hunt: पुरानी परंपरा, नया विवाद
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने खुद स्वीकार किया कि UAE राष्ट्रपति ने शिकार के लिए भी समय निकाला।
दरअसल:
- Houbara Bustard एक protected migratory bird है
- Gulf royals को पाकिस्तान special diplomatic permits देता रहा है
- Environment experts लगातार विरोध करते रहे हैं
उनका कहना है:
“Conservation on paper, hunting on ground.”
हौबारा बस्टर्ड क्यों है इतना संवेदनशील?
- दुर्लभ प्रवासी पक्षी
- Natural ecosystem का अहम हिस्सा
- शिकार से population में गिरावट
परंपरा बनाम पर्यावरण — पाकिस्तान में यह बहस हर बार रेगिस्तान में दबा दी जाती है।
UAE–Pakistan रिश्ते Investment भी, Politics भी, Tradition भी। लेकिन जब military-grade cargo planes उतरें, तो सवाल उठना लाज़मी है।
क्योंकि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में जो दिखता है, वही पूरी कहानी नहीं होती।
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