IRGC की खुली धमकी Netanyahu का पीछा करेंगे और मार गिराएंगे

हुसैन अफसर
हुसैन अफसर

जंग सिर्फ मिसाइलों से नहीं लड़ी जाती… कभी-कभी एक वीडियो की एक उंगली भी पूरी दुनिया में भूचाल ला देती है।
मध्य-पूर्व में चल रही Iran-Israel जंग के बीच अचानक सोशल मीडिया पर एक अजीब अफवाह उछली, जैसे किसी ने बारूद के ढेर पर माचिस फेंक दी हो. दावा किया गया कि इज़राइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu अब इस दुनिया में नहीं हैं.

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती. इस अफवाह की जड़ बना एक ऐसा वीडियो, जिसमें नेतन्याहू के हाथ में छह उंगलियां दिखाई दे रही थीं. बस फिर क्या था… इंटरनेट के डिजिटल दरबार में साजिशों की अदालत लग गई. किसी ने इसे AI का कारनामा बताया, तो किसी ने इसे “डिजिटल बॉडी-डबल” का ड्रामा कह दिया.

सोशल मीडिया की अदालत और ‘छठी उंगली’ का ट्रायल

जब युद्ध चलता है तो सच अक्सर धुएं में छिप जाता है. ठीक वैसा ही हुआ. नेतन्याहू ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अमेरिका-इज़राइल-ईरान संघर्ष से जुड़ा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस वीडियो साझा किया. वीडियो के 0:35 सेकंड पर उनका हाथ कैमरे में आया और इंटरनेट के जासूसों ने तुरंत फैसला सुना दिया.

“यह AI वीडियो है… देखो छठी उंगली!”

दरअसल छोटी उंगली के पास दिख रहे मांस के उभार को कई यूजर्स ने “AI Finger Glitch” बता दिया. देखते-देखते #NetanyahuDead और #AIVideo जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे.

डिजिटल भीड़ की यह खासियत है कि यहां सबूत बाद में आते हैं और फैसला पहले हो जाता है.

ईरान की IRGC ने अफवाहों में डाला बारूद

इस बीच ईरान की Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने ऐसा बयान दिया जिसने इस अफवाह को और हवा दे दी.

IRGC ने कहा, “अगर अपराधी प्रधानमंत्री अभी भी जिंदा है, तो हम पूरी ताकत से उसका पीछा करेंगे और उसे मार गिराएंगे.”

इतना ही नहीं, बयान में नेतन्याहू को “बच्चों का हत्यारा” कहा गया.

यह बयान ऐसा था जैसे पहले से जल रही आग पर किसी ने पेट्रोल छिड़क दिया हो. सोशल मीडिया पर बैठे युद्ध-विश्लेषकों ने इसे अलग-अलग तरह से पढ़ा.

किसी ने कहा यह मनोवैज्ञानिक युद्ध है, तो किसी ने इसे ईरान की प्रोपेगैंडा स्ट्रैटेजी बताया.

नेतन्याहू के ऑफिस का जवाब: “सब फेक है”

जब अफवाहें बेलगाम दौड़ने लगीं, तब नेतन्याहू के ऑफिस को सामने आना पड़ा. प्रधानमंत्री कार्यालय ने साफ शब्दों में कहा “ये सभी दावे फेक न्यूज़ हैं. प्रधानमंत्री पूरी तरह सुरक्षित हैं.”

फैक्ट-चेक करने वाले कई अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म ने भी जांच के बाद बताया कि वीडियो में दिख रही “छठी उंगली” दरअसल कैमरे के एंगल और लाइटिंग का भ्रम था.

यानी जिस चीज को इंटरनेट ने AI का सबूत मान लिया, वह असल में ऑप्टिकल इल्यूजन निकली.

डिजिटल युद्ध का नया हथियार: अफवाह

आज की जंग में टैंक और मिसाइल के साथ एक और हथियार जुड़ गया है… वायरल अफवाह. एक वायरल पोस्ट, एक एडिटेड वीडियो या एक गलत व्याख्या, और देखते ही देखते पूरी दुनिया में भ्रम फैल जाता है.

विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना बताती है कि कैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म सूचना के साथ-साथ भ्रम का भी एक्सप्रेसवे बन चुके हैं.

सच की सांस अक्सर देर से सुनाई देती है

इस पूरे घटनाक्रम में एक बात साफ है. मध्य-पूर्व की जंग अब सिर्फ जमीन या आसमान में नहीं लड़ी जा रही. यह जंग डिजिटल स्पेस में भी उतनी ही तेज है. और इस डिजिटल युद्ध में कभी-कभी एक वीडियो की “छठी उंगली” भी पूरी दुनिया को उलझा सकती है.

लेकिन फिलहाल सच्चाई यही है नेतन्याहू जिंदा हैं, सुरक्षित हैं… और इंटरनेट की अदालत एक बार फिर गलत साबित हुई है.

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