
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज है। नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है और अब उनके AIMIM का दामन थामने की अटकलें ज़ोर पकड़ रही हैं।
हालांकि अभी औपचारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे next big move माना जा रहा है।
BSP से Congress तक, अब AIMIM?
नसीमुद्दीन सिद्दीकी कभी BSP सुप्रीमो मायावती के सबसे भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते थे। उन्हें पार्टी में Mayawati’s right-hand man कहा जाता था।
लेकिन 2017 UP Assembly Election के बाद मायावती ने उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया।
इसके बाद सिद्दीकी ने खुलकर पलटवार किया और मायावती पर कई गंभीर आरोप लगाए—जिससे BSP नेतृत्व काफी असहज हुआ।
Congress में भी नहीं जमी बात
BSP से बाहर होने के बाद सिद्दीकी ने कांग्रेस का रुख किया, लेकिन वहां भी उनका राजनीतिक ग्राफ अपेक्षित ऊंचाई नहीं पकड़ सका। अब कांग्रेस से इस्तीफे के बाद सवाल साफ है— क्या AIMIM बनेगा उनका अगला सियासी पड़ाव?
AIMIM क्यों बन सकता है नया ठिकाना?
AIMIM उत्तर भारत में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। नसीमुद्दीन का अनुभव और मुस्लिम वोटबैंक पर पकड़ AIMIM के लिए फायदेमंद हो सकती है। UP में 2027 से पहले नए गठजोड़ की बिसात बिछाई जा रही है। यानी political timing भी बिल्कुल फिट बैठती है।

कल तक जो “core नेता” थे, आज “outsider” कहलाते हैं। और राजनीति में, दरवाज़े बंद हों तो नए झंडे मिल ही जाते हैं।
नसीमुद्दीन सिद्दीकी का कांग्रेस से इस्तीफा सिर्फ पार्टी बदलने की खबर नहीं है, बल्कि यह UP Politics के shifting power equations का संकेत है।
अब सबकी नजर इस पर टिकी है कि— क्या AIMIM इस मौके को बड़ा सियासी दांव बनाएगी?
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