मंदिर से लौटते ही मौत! महासमुंद रोपवे हादसा—टूटा तार, गिर गई ट्रॉली

संजीव पॉल
संजीव पॉल

नवरात्रि की सुबह… आस्था से भरे कदम… और मंदिर से लौटती एक ट्रॉली। लेकिन कुछ ही सेकंड में यह सफर ‘श्रद्धा’ से ‘शोक’ में बदल गया। Khallari Mata Temple के पास हुआ यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की उस चुप्पी का नतीजा है, जो अक्सर हादसे के बाद ही टूटती है।

कैसे टूटा भरोसा—और साथ ही तार भी

रविवार सुबह करीब 10 बजे, आठ श्रद्धालुओं से भरी रोपवे ट्रॉली पहाड़ी से नीचे उतर रही थी। अचानक—एक तेज झटका… और फिर सब कुछ बदल गया। ट्रॉली का केबल (तार) टूट गया। कुछ सेकंड के भीतर ट्रॉली नियंत्रण से बाहर हुई और नीचे जा गिरी। यह सिर्फ एक मैकेनिकल फेलियर नहीं था— यह उस भरोसे का टूटना था, जो लोग सिस्टम पर करते हैं।

एक जिंदगी खत्म, कई जिंदगियां जख्मी

इस हादसे में 28 वर्षीय आयुषी सातकार की मौके पर ही मौत हो गई। सात अन्य लोग घायल हुए—कुछ गंभीर, कुछ सदमे में। अस्पताल के गलियारों में सिर्फ इलाज नहीं चल रहा… वहां सवाल भी घूम रहे हैं “क्या यह टल सकता था?” “क्या जांच पहले होनी चाहिए थी?”

अस्पताल में जंग—डॉक्टर vs वक्त

घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों की टीम लगातार निगरानी में है। लेकिन असली लड़ाई सिर्फ शरीर की नहीं है— यह मानसिक आघात की भी है।

जांच शुरू—जिम्मेदारी किसकी?

जिला प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं। अब फोकस इस पर है केबल क्यों टूटा? क्या मेंटेनेंस में लापरवाही थी? क्या सुरक्षा मानकों का पालन हुआ था? हर हादसे के बाद यही सवाल उठते हैं…लेकिन जवाब अक्सर देर से आते हैं।

पूजा में वीआईपी लाइन, सुरक्षा में ‘वेटिंग लिस्ट’?

त्योहारों में भीड़ बढ़ती है, लेकिन क्या सुरक्षा भी उसी स्पीड से बढ़ती है? मंदिरों में VIP दर्शन की लाइनें तेज़ होती हैं…पर सेफ्टी चेक? वो अक्सर ‘भगवान भरोसे’ छोड़ दिया जाता है।

हादसे क्यों दोहराए जाते हैं?

भारत में ऐसे हादसे नए नहीं हैं। हर बार रिपोर्ट आती है “तकनीकी खराबी”, “जांच के आदेश”, “कड़ी कार्रवाई का आश्वासन” लेकिन असली सुधार? वह अक्सर फाइलों में अटक जाता है।

मुख्यमंत्री का बयान—और सिस्टम का इम्तिहान

Vishnu Deo Sai ने हादसे पर दुख जताया और घायलों के बेहतर इलाज के निर्देश दिए।

संवेदना जरूरी है…लेकिन उससे ज्यादा जरूरी है जवाबदेही!

आस्था की राह पर सुरक्षा का पहरा जरूरी

खल्लारी माता मंदिर में हुआ यह हादसा एक चेतावनी है। आस्था अपनी जगह है, लेकिन सुरक्षा उससे भी बड़ी जिम्मेदारी है। अगर सिस्टम नहीं जागा, तो अगली खबर फिर किसी और मंदिर से आएगी…और हेडलाइन वही होगी “भक्ति के रास्ते में मौत”।

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