ना प्रचार, ना वोट… फिर भी जीत! महाराष्ट्र में महायुति का चुनावी ‘वॉकओवर’

साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

महाराष्ट्र में 15 जनवरी को होने वाले नगर निकाय और बीएमसी चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां चरम पर हैं।
चुनावी पोस्टर, रैलियां और सोशल मीडिया कैंपेन अभी पूरी तरह शुरू भी नहीं हुए थे कि महायुति (Mahayuti) ने ऐसा दांव चला, जिसने पूरे राजनीतिक माहौल को बदल दिया।

दरअसल, नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख के बाद जो तस्वीर सामने आई, उसने साफ कर दिया कि इस बार मुकाबला सिर्फ ईवीएम पर नहीं, बल्कि रणनीति के मैदान में पहले ही जीत लिया गया है।

68 सीटें बिना वोटिंग के महायुति के खाते में

राज्य के अलग-अलग नगर निकायों में महायुति गठबंधन के कुल 68 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिए गए हैं। यानी— चुनाव आयोग का सर्टिफिकेट, जनता की मुहर से पहले और विपक्ष की एंट्री के बिना।

राजनीतिक हलकों में इसे कहा जा रहा है—“Pre-Poll Power Show”

बीजेपी सबसे आगे, सीटों का पूरा ब्रेकअप

इन 68 सीटों में बीजेपी ने सबसे बड़ा स्ट्राइक किया है।

Mahayuti Seat Breakup

  • BJP: 44 सीटें
  • Shiv Sena (Eknath Shinde): 22 सीटें
  • NCP (Ajit Pawar): 2 सीटें

बीजेपी का दबदबा साफ दिखता है, जबकि सहयोगी दल भी सम्मानजनक स्थिति में नजर आ रहे हैं।

ठाणे और पुणे में महायुति का क्लीन मूव

ठाणे जिले की कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में सबसे ज्यादा उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए, जिससे यह इलाका महायुति का मजबूत गढ़ बनकर उभरा है।

वहीं पुणे नगर निगम में वार्ड नंबर 35 से मंजूषा नागपुरे, श्रीकांत जगताप बीजेपी के पार्षद निर्विरोध निर्वाचित हुए।

मुरलीधर मोहोल का बड़ा दावा

केंद्रीय मंत्री मुरलीधर मोहोल ने इस जीत को लेकर खुलकर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि— “यह सिर्फ शुरुआत है। पुणे का अगला मेयर बीजेपी का होगा।”

इस बयान के बाद साफ है कि महायुति अब चुनाव को आक्रामक मोड में ले जाने की तैयारी में है।

विपक्ष की चुप्पी और सियासी सटायर

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कई सीटों पर विपक्ष उम्मीदवार नहीं उतार पाया तो कहीं अंदरूनी खींचतान भारी पड़ी। सियासी गलियारों में तंज कसा जा रहा है— “जब मैदान में उतरने वाला ही न हो, तो जीत भी लोकतांत्रिक ही कहलाती है!”

महाराष्ट्र में 15 जनवरी 2026 को प्रस्तावित स्थानीय निकाय और बीएमसी चुनाव से पहले महायुति गठबंधन को बड़ी बढ़त मिली है। नामांकन वापसी की प्रक्रिया के बाद राज्य के विभिन्न नगर निकायों में महायुति के कुल 68 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए हैं। इनमें बीजेपी के 44, शिवसेना (शिंदे गुट) के 22 और एनसीपी (अजित पवार गुट) के 2 उम्मीदवार शामिल हैं।

आगे क्या बदलेगा चुनावी खेल?

  • महायुति को मनोवैज्ञानिक बढ़त
  • विपक्ष पर डिफेंसिव दबाव
  • वोटिंग डे पर टर्नआउट और नैरेटिव दोनों प्रभावित

बीएमसी जैसे हाई-प्रोफाइल चुनाव में इसका असर सीधे सत्ता समीकरण पर पड़ सकता है।

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