
“परित्राणाय साधूनाम, विनाशाय च दुष्कृताम” — अगर इस श्लोक को भारत की विदेश नीति का कोर मेसेज बना दें, तो UN भी शायद भारत को “ग्लोबल गीता गाइड” घोषित कर दे!
भगवान श्रीकृष्ण, सिर्फ एक धर्मगुरु नहीं, बल्कि अपने समय के सबसे प्रभावशाली रणनीतिकार और डिप्लोमैट थे। कुरुक्षेत्र में युद्ध जीतने से पहले उन्होंने शब्दों की ऐसी बिसात बिछाई, कि दुश्मन भी चुपचाप मोहरे बन गए।
तो क्यों न कान्हा की क्लासिक कूटनीति से आज की दुनिया की बिसात पर भारत अपने पत्ते और मजबूत खेले?
“जब संवाद काम न आए, तब रणनीति जरूरी है” — कृष्ण स्टाइल स्ट्रैटेजी
विदेश नीति का पहला सबक: हर बार “स्ट्रॉन्गली कंडीम” करने से कुछ नहीं होता!
कान्हा हस्तिनापुर गए, संवाद किया, लेकिन जब शांति से काम नहीं बना, तो रणनीति और युद्ध कौशल अपनाया।
सीख: भारत को चीन-पाक जैसे पड़ोसियों से निपटने के लिए सिर्फ मीठी बातों से नहीं, सटीक रणनीति से आगे बढ़ना होगा।
“छल नहीं, चतुराई” — कृष्ण नीति vs क्लासिक डिप्लोमेसी
कृष्ण ने अर्जुन को कहा: “धर्म युद्ध में अधर्म से निपटने के लिए रणनीति बदलनी पड़े, तो बदलो।”
तो भाई साहब, कभी-कभी कूटनीति में थोड़ा ‘शकुनीगिरी’ भी ज़रूरी होती है, बस उद्देश्य राष्ट्रहित होना चाहिए।
सीख: भारत को इंटरनेशनल फोरम्स पर “ग्लोबल गुरु” के रोल से थोड़ा हटकर स्टील वाली डिप्लोमेसी भी दिखानी चाहिए।
Soft Power का असली ‘सुदर्शन’ — योग, गीता और कान्हा!
आज अमेरिका योग कर रहा है, जापान में गीता पढ़ी जा रही है — लेकिन बेचारा भारत सिर्फ IRCTC ऐप अपडेट कर रहा है।

सीख: श्रीकृष्ण जैसे Soft Power के मास्टर की तरह भारत को अपने संस्कृति, भाषा, और आस्था को डिप्लोमैटिक हथियार बनाना चाहिए।
दोस्ती करो लेकिन आँख बंद न करो — राधे-राधे, लेकिन रेड लाइन रेड ही रहे
कान्हा ने पांडवों को बार-बार कहा: “संधि करो, लेकिन आंखें खोलकर!”
सीख: भारत को अमेरिका, रूस, चीन जैसी ताकतों से संबंध बनाते समय “ग्लोबल लव” नहीं, “ग्लोबल लॉजिक” अपनाना चाहिए।
“चुप रहो, लेकिन सब देखो” — गीता वाला गुप्तचर मंत्र
कृष्ण जब महाभारत के दौरान मौन रहते थे, तब भी हर निर्णय पर उनकी पैनी नज़र होती थी।
सीख: भारत को भी विदेश नीति में इंटेलिजेंस, साइबर मॉनिटरिंग और बैकडोर डिप्लोमेसी को सशक्त करना होगा।
कृष्ण का कमाल, विदेश नीति में धमाल
श्रीकृष्ण की नीतियां सिर्फ धार्मिक उपदेश नहीं हैं, ये आज के दौर में भी रणनीति की रेफरेंस बुक हैं। अगर भारत थोड़ी गीता और थोड़ा ग्लोबल व्यू मिलाकर विदेश नीति बनाए, तो वर्ल्ड पॉलिटिक्स की कुरुक्षेत्र में भी भारत ही गीता सुनाएगा।
और हां, अगली बार कोई विदेश मंत्री बोले – “हमने मजबूती से चिंता व्यक्त की है…”
तो याद रखिए, कृष्ण होते तो शायद कहते – “मजबूती से श्री सुदर्शन दिखाया है!
कान्हा को माखन पसंद है? तो जन्माष्टमी पर ये भोग जरूर बनाएं!
