
कोलकाता हाई कोर्ट सहित पश्चिम बंगाल की कुल सात अदालतों को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद न्यायिक गलियारों में अचानक सन्नाटा पसर गया। एक धमकी भरे ई-मेल ने सुबह की नियमित कार्यवाही को आपातकालीन मोड में बदल दिया।
सूचना के अनुसार, कोलकाता के साथ-साथ आसनसोल, दुर्गापुर, बहरमपुर, सिउड़ी, रामपुरहाट और अलीपुर अदालत को भी निशाना बनाए जाने की चेतावनी दी गई है।
11:30 बजे आया मेल, 1 बजे धमाके का दावा
आसनसोल के डिस्ट्रिक्ट जज देव प्रसाद नाथ को सुबह लगभग 11:30 बजे यह ई-मेल प्राप्त हुआ। संदेश में दोपहर 1 बजे विस्फोट की बात कही गई थी।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत सभी न्यायिक कार्य स्थगित कर कोर्ट परिसर खाली कराया गया। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया गया।
कानून के मंदिर में अचानक सुरक्षा कवच कस दिया गया।
बम स्क्वॉड, डॉग स्क्वॉड और हाई अलर्ट
ई-मेल मिलते ही भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। आम लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई। बम स्क्वॉड और डॉग स्क्वॉड ने अदालत कक्षों और जज चेंबर की गहन तलाशी शुरू कर दी।
धमकी में अदालत परिसर में विस्फोटक रखने का दावा किया गया था, हालांकि अब तक किसी विस्फोटक सामग्री की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावना को नजरअंदाज करने के मूड में नहीं हैं।

साइबर ट्रैकिंग शुरू
सूत्रों के मुताबिक धमकी भरा ई-मेल बांग्ला भाषा में भेजा गया है। साइबर सेल ने तकनीकी जांच शुरू कर दी है। ई-मेल आईडी, आईपी ट्रैकिंग और डिजिटल फुटप्रिंट्स खंगाले जा रहे हैं।
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न्याय व्यवस्था पर मनोवैज्ञानिक हमला?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की धमकियां अक्सर दहशत फैलाने की रणनीति होती हैं। अदालतों को निशाना बनाना सीधे न्याय व्यवस्था को चुनौती देने जैसा है।
लेकिन फिलहाल प्रशासन की त्वरित कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि अफवाहों से ज्यादा मजबूत सुरक्षा तंत्र है।
परिसर में कोई विस्फोटक नहीं मिला है, लेकिन यह घटना सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक रियल-टाइम ड्रिल बन गई है। न्याय की इमारतें मजबूत हैं, और सुरक्षा का घेरा उससे भी मजबूत।
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