मीटिंग में मचा राजनीतिक महाभारत! सांसद बोले– मैं ही असली हिस्ट्रीशीटर हूं

अजमल शाह
अजमल शाह

कानपुर देहात की राजनीति का “देसी ड्रामा वर्शन” इस हफ्ते देखने को मिला जब बीजेपी के दो नेता — सांसद देवेंद्र सिंह भोले और पूर्व सांसद अनिल शुक्ला वारसी — ‘दिशा’ की बैठक में ऐसे भिड़े जैसे कोई चुनावी रण छेड़ दिया गया हो।
मीटिंग का मकसद था विकास कार्यों की समीक्षा, लेकिन जो हुआ वो राजनीतिक रिव्यू नहीं, रिवाइंड ऑफ एंगर बन गया।

DM-SP के सामने ‘Desi Parliament Session’

डीएम, एसपी और तमाम अफसर अपनी फाइलों में झाँक रहे थे कि तभी अचानक बहस का तापमान बढ़ा।
भोले बोले – “मंत्री के पति मुझे सांसद नहीं मानते!”
वारसी ने पलटवार किया – “आप तो फैक्ट्री मालिकों से वसूली करते हैं!”
बस फिर क्या था, मीटिंग विकास से हटकर “वाकयुद्ध” में बदल गई।

महिला पुलिसकर्मी बीच-बचाव को आईं — लेकिन सियासी जोश में कोई पीछे हटने को तैयार नहीं था।

सांसद का दावा: “मैं ही असली हिस्ट्रीशीटर हूं!”

सांसद देवेंद्र सिंह भोले ने कैमरे के सामने वो कह दिया जो कोई नेता कभी नहीं कहता — “मुझे बड़ा बदमाश कानपुर देहात में कोई नहीं है। मैं हिस्ट्रीशीटर हूं, मेरे खिलाफ 13 मुकदमे हैं!”

किसी ने तालियां बजाईं, किसी ने नोट्स बनाए, और बाकी सब सोच में पड़ गए कि यह राजनीतिक इमेज बिल्डिंग है या क्राइम प्रोमोशन स्ट्रैटेजी

पूर्व सांसद का पलटवार: “भोले जी भोले नहीं रहे!”

अनिल शुक्ला वारसी ने भी हार नहीं मानी। बोले — “सांसद भोले फैक्ट्री मालिकों से वसूली करते हैं। विकास के नाम पर बस धमकियां मिलती हैं।”

अब यह बयान किसी Netflix political series से कम नहीं लग रहा — बस एपिसोड का नाम रख दें “दिशा मीटिंग: सीजन 1”।

‘दिशा’ मीटिंग या ‘दिशाहीन’ राजनीति?

जिस बैठक का उद्देश्य था विकास की दिशा तय करना, वहाँ नेताओं ने दिशा बदल दी — और पूरी मीटिंग राजनीतिक WWE एरिना बन गई।
अफसर समझ नहीं पाए कि नोट्स लें या ‘माइक’ पकड़ें। आखिर में मीटिंग स्थगित कर दी गई, ताकि सभी का “ब्लड प्रेशर” न बढ़े।

यूपी की राजनीति में यह बहस याद दिलाती है कि जब दो नेता भिड़ते हैं — “विकास की दिशा” गायब हो जाती है, और “ड्रामा की दिशा” अपने आप मिल जाती है।

“Breaking: ट्रंप पहुंचे कुरुक्षेत्र — बोले, No more war, only trade deal!”

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