
कैलाश मानसरोवर यात्रा (KMY) के 2025 संस्करण का समापन हो गया है। रविवार को 10वां और अंतिम जत्था नाथू ला दर्रे के रास्ते सुरक्षित भारत लौट आया। कुल 48 तीर्थयात्रियों का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए सिक्किम पर्यटन विकास निगम (STDC) ने यात्रा की सफलता का जश्न मनाया।
19,500 फीट की ऊंचाई और अद्भुत भक्ति का संगम
कैलाश मानसरोवर यात्रा भारत के सबसे धार्मिक और चुनौतीपूर्ण तीर्थों में से एक है। तीर्थयात्री लगभग 19,500 फीट की ऊँचाई पर स्थित कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील तक पहुंचते हैं, जिसे हिंदू धर्म में भगवान शिव का निवास माना जाता है।
यात्रा के दौरान भक्तों को अत्यधिक ठंड, ऊबड़-खाबड़ रास्ते और ऑक्सीजन की कमी जैसे शारीरिक जोखिमों का सामना करना पड़ता है, इसलिए मजबूत इच्छा शक्ति और चिकित्सा फिटनेस बेहद आवश्यक होती है।
समापन समारोह और यात्रा की सफलता
इस अवसर पर एक समापन समारोह का आयोजन किया गया, जहां STDC के चेयरमैन लुकेंद्र रसैली ने तीर्थयात्रा के सफल समापन पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने बताया:
“इस वर्ष लगभग 500 तीर्थयात्रियों ने इस पवित्र यात्रा में हिस्सा लिया। ये संभव हुआ STDC की टीम, अर्धसैनिक बलों और विभिन्न एजेंसियों के सहयोग से।”
– लुकेंद्र रसैली, STDC अध्यक्ष
नाथू ला दर्रा: एक रणनीतिक और लोकप्रिय रूट
नाथू ला दर्रा सिक्किम से तिब्बत के रास्ते कैलाश मानसरोवर तक जाने वाला एक प्रमुख मार्ग है, जिसे चीन और भारत की सहमति से खुला रखा गया है। यह रूट यात्रियों को कठिनाई तो देता है, लेकिन सुरक्षित और व्यवस्थित अनुभव भी प्रदान करता है।
यह सिर्फ यात्रा नहीं, एक आध्यात्मिक पुनर्जन्म है
हर साल, कैलाश मानसरोवर यात्रा:

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आध्यात्मिक जागरूकता लाती है
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शरीर और मन की सीमा को चुनौती देती है
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विश्वास, सहनशीलता और भक्ति का गहन अनुभव कराती है
यात्रियों की ज़ुबानी
एक तीर्थयात्री, ने कहा:
“यह जीवन का अनुभव था। हर कदम भगवान शिव के और करीब ले गया। थकान थी, पर भक्ति और ऊर्जा उससे बड़ी थी।”
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