“छोटे अपराध? कोई बात नहीं!” – Jan Vishwas Bill 2.0 से बड़ी राहत

सैफी हुसैन
सैफी हुसैन, ट्रेड एनालिस्ट

18 अगस्त का दिन व्यापारियों के लिए किसी Business Diwali से कम नहीं। लोकसभा में Jan Vishwas (Amendment) Bill 2.0 पेश किया जा रहा है, जिसमें 350 से अधिक छोटे व्यापारिक अपराधों को “सज़ा मुक्त” किया जाएगा।

यानि अपराध तो रहेगा, लेकिन पकड़कर जेल में नहीं डालेंगे!
जैसे मम्मी कहे – “तूने गलती की है, लेकिन इस बार छोड़ रही हूँ। अगली बार देख लूंगी।”

क्या बदल रहा है इस बिल से?

  • 350 व्यापारिक नियमों में संशोधन

  • छोटे व्यापार अपराधों पर अब न सज़ा, न जुर्माना (कुछ मामलों में जुर्माना रहेगा)

  • अपराध गैरकानूनी रहेंगे, लेकिन कानूनी लाठी नहीं चलेगी

  • देश में “Ease of Doing Business” को मिलेगा बढ़ावा

सरकार ने पहले 2023 में भी 183 प्रावधानों में से सज़ा हटाकर इसकी शुरुआत की थी। अब 2.0 वर्जन में और विस्तार दिया जा रहा है।

व्यापारियों के लिए क्या फ़ायदा?

  • पुलिस/इंस्पेक्टर के चक्कर से छुटकारा

  • छोटे कागज़ी अपराधों के लिए जेल नहीं

  • डर का माहौल घटेगा, बिजनेस करने की आज़ादी बढ़ेगी

  • Startups और MSMEs को बड़ा फायदा

अब फॉर्म गलत भरने पर जेल जाने का डर नहीं रहेगा — बस GST भरना मत भूलना, वरना बिल अलग बन जाएगा!

पीएम मोदी ने लाल किले से दिया था संकेत

15 अगस्त को PM मोदी ने “Next Gen Reforms” की बात की थी और टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था:

“ऐसे अनावश्यक कानून, जो नागरिकों को बेवजह जेल भेजते हैं, अब खत्म होंगे। भारत की जनता डर के साए में नहीं, भरोसे के साथ जिए।”

और सरकार ने यह वादा संसद में बिल पेश कर पूरा करने की ओर कदम बढ़ाया है।

लेकिन ध्यान रहे – अपराध अभी भी अपराध है!

सज़ा हट गई है, पर इसका मतलब ये नहीं कि आप खुलेआम नियम तोड़ सकते हैं। ये बिल व्यापार को सरल बनाने के लिए है, लापरवाही को बढ़ावा देने के लिए नहीं।

Example:

  • अगर आपने फॉर्म A की जगह फॉर्म B भर दिया – सज़ा नहीं

  • लेकिन अगर आप धोखाधड़ी करते हैं – तो CID वाले फिर भी पहुँच जाएंगे!

“जन विश्वास” बढ़ा, व्यापार आसान बना

Jan Vishwas Bill 2.0 सरकार का एक बड़ा कदम है जो भारत को “Compliance से Confidence” की ओर ले जा रहा है।

अब व्यापारी डर कर नहीं, भरोसे से व्यापार करेगा।

“एक ज़माना था जब छोटी गलती पर भी व्यापारी सोचता था – ‘अब कौन जमानत कराएगा?’
अब वो सोचता है – ‘गलती हुई? ठीक है, अगली बार नहीं होगी!’ और चाय पीकर काम पर लौटता है।”

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