“जात भी देखी, जज्बा भी, और भोजपुरी तड़का भी!” – पीके की रेसिपी तैयार!

सुरेन्द्र दुबे ,राजनैतिक विश्लेषक
सुरेन्द्र दुबे ,राजनैतिक विश्लेषक

बिहार में 243 सीटों पर चुनाव लड़ने का एलान करने वाली प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज ने अपनी पहली उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी है। कुल 51 उम्मीदवारों को टिकट देकर उन्होंने दिखा दिया है कि वो सिर्फ रणनीतिकार ही नहीं, अब टिकट मास्टर भी बन चुके हैं।

लेकिन PK स्टाइल में थोड़ी रणनीति, थोड़ी सोशल इंजीनियरिंग और थोड़ा “भोजपुरी मसाला” तो बनता है, Boss!

जातिगत गणित या सामाजिक विज्ञान का प्रैक्टिकल?

उम्मीदवारों के चयन में PK ने वो कर दिखाया जो बड़े-बड़े समाजशास्त्री सोचते ही रह जाते हैं। जानिए लिस्ट में जातीय तड़का:

  • अनुसूचित जाति – 7

  • अतिपिछड़े – 17

  • पिछड़े – 11

  • अल्पसंख्यक – 8

  • सामान्य वर्ग – 8

यानि टिकट बांटने से पहले PK ने जातीय कैलकुलेटर चार्ज कर रखा था।

भोजपुरी स्टार रितेश पांडे को मिला “PK प्रोडक्शन” का टिकट

इस बार राजनीति में फिल्मी तड़का भी है। भोजपुरी सिंगर रितेश पांडे, जो “Hello Kaun” से कॉलर ट्यून बने थे, अब जन सुराज की करगहर सीट से उम्मीदवार बन गए हैं।
मजेदार बात ये कि यहीं से खुद PK लड़ने वाले थे, पर अब कह रहे हैं – “मैं बस डायरेक्टर हूं, पर्दे पर हीरो कोई और होगा।”

“वोट कटुआ” या “बिगड़ा समीकरण”? विरोधी दल परेशान!

जन सुराज को लेकर विपक्ष कहता है कि ये सिर्फ “वोट कटुआ पार्टी” है। मतलब ये नहीं जीतती, पर दूसरों को जितने नहीं देती। इसका असर ऐसा है कि कई सीटों पर RJD-Congress की सीटें हवा में झूलने लगी हैं। अब PK कह रहे हैं – “हम तो आईने हैं, जो खुद को देखना नहीं चाहते, वही चिल्ला रहे हैं।”

कुछ खास चेहरे और दिलचस्प नाम

  • प्रीति किन्नर (भोरे) – राजनीति में ट्रांसफॉर्मेशन literally!

  • जागृति ठाकुर (मोरवा) – कर्पूरी ठाकुर जी का खून है, वोट में जूनून है।

  • शमीम अनवर (महिषी) – साहित्यिक टच भी जरूरी है।

और बाकी उम्मीदवारों की लंबी लिस्ट है, जिसमें हर वर्ग को ‘थोड़ा थोड़ा प्यार’ मिला है।

PK खुद नहीं लड़ेंगे चुनाव – रणनीति ही असली हथियार

प्रशांत किशोर खुद चुनाव नहीं लड़ रहे। उनका कहना है कि “मैं उम्मीदवार नहीं, विचारधारा हूं।”
राजनीति की बैकएंड स्क्रिप्टिंग में वो माने जाते हैं Christopher Nolan of Politics – जो कैमरे के पीछे रहकर भी क्लाइमेक्स तय करते हैं।

बिहार चुनाव का नया चेहरा या सियासी स्टंट?

PK की यह लिस्ट बताती है कि चुनाव अब नारेबाज़ी से नहीं, डेटा और डिस्ट्रिक्ट मैपिंग से लड़े जाते हैं। पर असली सवाल यही है — क्या जनता सिर्फ जाति और चेहरा देखकर वोट देगी, या काम और विज़न देखकर?

जन सुराज की यह पहली लिस्ट भले ही छोटे टीज़र जैसी हो, लेकिन बिहार की सियासत में PK ने फिर से TRP और टेंशन दोनों बढ़ा दी है।

PK की पहली लिस्ट में दिखा स्मार्ट माइंड, सोशल बैलेंस और स्टार अपील का कॉकटेल। अब देखना ये है कि क्या ये “राजनीतिक प्लेट” जनता के स्वाद के हिसाब से है या सिर्फ ट्विटर के ट्रेंडिंग टॉपिक के लिए बनी है।

“खिलाड़ी बनो, हीरो बनो!” झांसी से सीएम योगी का सुपरहिट मंत्र!

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