
ईरान और अमेरिका के बीच हालात अब सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं रहे। ज़मीन पर भले ही मिसाइलें न चली हों, लेकिन बयानों की बमबारी पूरी रफ्तार में है।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने साफ शब्दों में कहा है, न्यूक्लियर डील करो, वरना युद्ध के लिए तैयार रहो।
इसके जवाब में ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei ने भी नरमी दिखाने के बजाय आग में घी डाल दिया।
Trump का ऑफर या अल्टीमेटम?
Donald Trump ने ईरान को युद्ध से बचने का एक “मौका” दिया है, न्यूक्लियर समझौता।
Trump का कहना है कि अमेरिका युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अगर ईरान ने परमाणु कार्यक्रम पर समझौता नहीं किया तो सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा। उनके शब्दों में, “War तभी होगा, जब deal नहीं होगी।”
मतलब साफ है—डील टेबल पर है, लेकिन बंदूक भी पास ही रखी है।
Khamenei की चेतावनी: अकेला नहीं जलेगा ईरान
ईरान के सुप्रीम लीडर Ali Khamenei ने Trump की चेतावनी को सीधे चुनौती दी। 31 जनवरी को दिए बयान में उन्होंने कहा कि ईरान कमजोर नहीं है और न ही झुकेगा।
उनका सबसे सख्त संदेश यह था, अगर अमेरिका ने हमला किया, तो यह लड़ाई सिर्फ Iran vs US नहीं रहेगी, बल्कि पूरा Middle East इसकी आग में झुलसेगा। यानी जंग हुई, तो radius बहुत बड़ा होगा।
Trump का पलटवार: “फिर देखेंगे कौन सही था”
Khamenei की धमकी पर Trump ने भी जवाब देने में देर नहीं की। उन्होंने कहा कि तनाव जरूर चरम पर है, लेकिन अभी भी बातचीत का रास्ता खुला है।
Trump का तंज भरा बयान था, “अगर डील नहीं हुई, तो पता चल जाएगा कि Khamenei सही थे या नहीं।”

मतलब—इतिहास फैसला करेगा, बयान नहीं।
बैकडोर डिप्लोमेसी: Oman और Moscow की एंट्री
जहां एक तरफ सार्वजनिक मंच पर तल्ख बयानबाजी चल रही है, वहीं दूसरी ओर quiet diplomacy भी जारी है। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने CNN को दिए इंटरव्यू में कहा कि दोनों देश decisive moment पर खड़े हैं।
उनके मुताबिक, निष्पक्ष nuclear deal अभी भी संभव है। लेकिन किसी भी गलतफहमी या आक्रामक कदम का जवाब ईरान देगा।
फिलहाल Oman के जरिए talks चल रही हैं और Moscow में ईरान की Supreme National Security Council से जुड़े अधिकारी भी सक्रिय हैं।
तेल, सत्ता और साजिश का आरोप
Khamenei ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह ईरान के oil reserves पर कब्जा करना चाहता है, ठीक वैसे ही जैसे उसने Venezuela के साथ किया।
उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान में हाल के वर्षों में हुए विरोध प्रदर्शनों के पीछे भी अमेरिका की साजिश थी। यानी लड़ाई सिर्फ परमाणु कार्यक्रम की नहीं, बल्कि नियंत्रण और संसाधनों की है।
एक तरफ दुनिया “शांति” की बात करती है, दूसरी तरफ हर बयान के साथ Middle East का तापमान बढ़ता जा रहा है।
Trump डील की बात करते हैं, Khamenei जंग की चेतावनी देते हैं और बीच में खड़ा पूरा इलाका पूछ रहा है “अगर दोनों अड़ गए, तो कीमत कौन चुकाएगा?”
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