तेहरान vs वॉशिंगटन: पासपोर्ट बना पॉलिटिकल पासा!

हुसैन अफसर
हुसैन अफसर

मिडिल ईस्ट में सियासी तापमान फिर उबल रहा है। अमेरिका ने ईरान पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वहां डबल पासपोर्ट वाले अमेरिकी नागरिकों को छोटी-छोटी बातों पर गिरफ्तार किया जा रहा है। वॉशिंगटन का दावा है कि ये गिरफ्तारियां “डिप्लोमैटिक बारगेनिंग चिप” की तरह इस्तेमाल हो रही हैं यानी इंसान नहीं, अंतरराष्ट्रीय शतरंज की गोटियां।

Rubio का डिजिटल ऐलान, Tehran की खामोशी

अमेरिकी विदेश सचिव Marco Rubio ने एक्स (X) प्लेटफॉर्म पर ईरान को “State Sponsor of Wrongful Detention” घोषित कर दिया। सीधा संदेश “तुरंत रिहाई।”

उधर, ईरान की ओर से आधिकारिक चुप्पी। लेकिन सियासत में खामोशी भी कभी-कभी सबसे तेज बयान होती है।

खामेनेई की सरकार पर आरोप

अमेरिका का कहना है कि यह सब Ali Khamenei के नेतृत्व वाली सरकार की रणनीति है डबल सिटिजनशिप वाले अमेरिकियों को पकड़ो और फिर बातचीत की मेज पर दबाव बनाओ।

यह वही पुराना “Hostage Diplomacy Model” है, जिसे कई बार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाया जा चुका है। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार बयानबाज़ी ज्यादा खुली और सार्वजनिक है।

Trump का Peace Mode या Tactical Pause?

दिलचस्प बात यह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump फिलहाल “शांतिपूर्ण डील” की बात कर रहे हैं। सवाल यह है क्या यह डैमेज कंट्रोल है? या फिर आने वाले किसी बड़े कदम से पहले कूटनीतिक विराम?

ट्रंप की रणनीति अक्सर “maximum pressure, sudden negotiation” मॉडल पर चलती रही है। पहले ट्वीट से तापमान बढ़ाओ, फिर बातचीत का दरवाज़ा खोल दो।

Israel अलर्ट, Embassy Advisory और Global Panic

तनाव सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं। इजरायल में भी हालात संवेदनशील बताए जा रहे हैं। अमेरिका ने अपने नागरिकों को तुरंत इजरायल छोड़ने की सलाह दी है। अमेरिकी राजदूत Mike Huckabee ने एम्बेसी स्टाफ को विकल्प दिया “जो जाना चाहते हैं, आज ही निकल जाएं।”

अमेरिका के साथ चीन और कनाडा ने भी अपने नागरिकों को ईरान छोड़ने की एडवाइजरी जारी की है। यह कदम अपने आप में संकेत है कि वैश्विक एजेंसियां किसी संभावित escalation को हल्के में नहीं ले रहीं।

Middle East: शांति की उम्मीद या तूफान की आहट?

इस तरह की एडवाइजरी आमतौर पर तब जारी होती है जब “intelligence inputs” में खतरे की आशंका बढ़ जाती है। अगर अमेरिका और ईरान के बीच सीधी टकराव की नौबत आती है, तो इसका असर सिर्फ तेहरान और वॉशिंगटन तक सीमित नहीं रहेगा तेल बाजार, शेयर बाजार और एशियाई भू-राजनीति तक लहरें जाएंगी।

कूटनीति आजकल व्हाट्सऐप स्टेटस जैसी हो गई है पहले ब्लॉक करो, फिर स्टेटस लगाओ, फिर ‘Let’s Talk’ लिख दो। पासपोर्ट अब सिर्फ पहचान नहीं, अंतरराष्ट्रीय दबाव का टूल बनता दिख रहा है। सवाल यही है क्या यह शतरंज की चाल है या वाकई किसी बड़े भू-राजनीतिक भूकंप की प्रस्तावना?

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