Khamenei की पत्नी की मौत के बाद IRGC ‘Out of Control’

Saima Siddiqui
Saima Siddiqui

ईरान और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष के बीच एक नया मोड़ सामने आया है। Ali Khamenei की मौत के बाद इन हमलों में उनकी पत्नी, मंसूरेह खोजस्तेह बघेरजादेह (Mansoureh Khojasteh Bagherzadeh), गंभीर रूप से घायल हुई थीं और उनकी भी मौत हो गई है। इसी बीच ईरान के विदेश मंत्री Seyyed Abbas Araghchi ने दावा किया है कि सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत के बाद देश की ताकतवर सैन्य इकाई Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) अब सरकार के सीधे नियंत्रण में नहीं रही।

खामेनेई की मौत और सत्ता का शून्य

सरकारी मीडिया के अनुसार, हालिया हमलों के दौरान खामेनेई गंभीर रूप से घायल हुए थे और बाद में उनका निधन हो गया। देश में 40 दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया है।

खामेनेई सिर्फ धार्मिक नेता नहीं थे वे सैन्य और राजनीतिक निर्णयों के अंतिम केंद्र थे। उनकी अनुपस्थिति ने सत्ता के ढांचे में एक बड़ा vacuum पैदा कर दिया है।

“कुछ हमलों के आदेश हमने नहीं दिए”

विदेश मंत्री का कहना है कि ओमान सहित कुछ ठिकानों पर हुए हालिया हमले सरकार की प्राथमिकता का हिस्सा नहीं थे। दावा यह भी है कि कई मिसाइल और ड्रोन ऑपरेशन IRGC ने अपने स्तर पर शुरू किए। अगर यह सच है, तो इसका मतलब है कि ईरान के भीतर command and control structure में दरार पड़ चुकी है।

IRGC क्यों बना चिंता का कारण?

IRGC ईरान की सबसे ताकतवर सैन्य संस्था मानी जाती है। इसके पास बैलिस्टिक मिसाइलें, ड्रोन फ्लीट, नौसेना और स्पेशल कमांडो यूनिट्स हैं।

अगर यह इकाई राजनीतिक नेतृत्व से स्वतंत्र होकर कार्रवाई करती है, तो युद्ध का दायरा सिर्फ ईरान-इजरायल तक सीमित नहीं रहेगा। Defense experts का मानना है कि इससे पूरे Middle East में instability और बढ़ सकती है।

International Fallout: बढ़ती वैश्विक चिंता

वैश्विक समुदाय पहले से ही तनाव में है। अगर ईरान के भीतर ही सत्ता संघर्ष तेज हुआ, तो यह स्थिति और अनिश्चित हो सकती है। Israel लगातार हमले कर रहा है, और जवाबी कार्रवाई भी जारी है। अब सवाल यह है क्या Tehran में राजनीतिक नेतृत्व हालात संभाल पाएगा?

जब देश का Supreme Leader नहीं रहा, तो क्या “सुप्रीम कमांड” अपने-आप बन जाती है? राजनीति का vacuum अक्सर सबसे ताकतवर संस्थाओं को आगे ला देता है। लेकिन युद्ध में “independent decision” का मतलब अक्सर uncontrolled escalation होता है।

ईरान-इजरायल संघर्ष अब सिर्फ दो देशों की लड़ाई नहीं रहा। यह आंतरिक सत्ता संतुलन और क्षेत्रीय शक्ति समीकरण का सवाल बन चुका है।अगर IRGC सच में autonomous तरीके से फैसले ले रहा है, तो आने वाले दिन Middle East के लिए और ज्यादा volatile हो सकते हैं।

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