दुनिया की नजरें Middle East पर, जेब पर असर भारत में

सैफी हुसैन
सैफी हुसैन, ट्रेड एनालिस्ट

Middle East में अमेरिका और इजराइल की ईरान के खिलाफ बड़ी सैन्य कार्रवाई ने ग्लोबल टेंशन बढ़ा दिया है। एक आम निवेशक के लिए सवाल साफ है क्या अब पोर्टफोलियो संभालें या पैनिक बटन दबाएँ?

सच्चाई यह है कि युद्ध सिर्फ बॉर्डर पर नहीं होता, उसका असर किचन और कैंडलस्टिक चार्ट दोनों पर दिखता है।

कच्चा तेल: असली गेम चेंजर

ईरान और खाड़ी देश ऊर्जा सप्लाई के अहम खिलाड़ी हैं। सप्लाई चेन में जरा सी रुकावट, और अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल उछल जाता है।

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। तेल महंगा हुआ तो पेट्रोल-डीजल महंगा, ट्रांसपोर्ट महंगा, और फिर सब्जी से लेकर स्मार्टफोन तक सब पर असर।

सीधा मतलब  Inflation का नया बहाना तैयार।

सोना-चांदी: डर का पुराना ठिकाना

इतिहास गवाह है जंग का माहौल बनते ही निवेशक सेफ हेवन ढूंढते हैं। Gold और Silver में अक्सर तेज उछाल देखने को मिलता है। Gap-up ओपनिंग, रिकॉर्ड हाई, और सोशल मीडिया पर “अब भी मौका है?” वाले पोस्ट।

डर जब बढ़ता है, तो तिजोरी चमकती है।

शेयर बाजार: Fear vs Fundamentals

शुक्रवार को बिकवाली के संकेत मिल चुके थे। सोमवार को Volatility बढ़ सकती है। BSE और NSE में उतार-चढ़ाव तय है। लेकिन याद रखिए मार्केट इमोशन पर चलता है, वैल्यू पर टिकता है। Long Term निवेशकों के लिए गिरावट कभी-कभी “Discount Sale” भी बन जाती है।

किन सेक्टर्स पर सीधा असर?

एविएशन

जेट फ्यूल महंगा = एयरलाइंस के मार्जिन पर प्रेशर। टिकट महंगे, यात्री नाराज़।

पेंट्स और ऑटो

ये सेक्टर पेट्रोकेमिकल बेस्ड हैं। कच्चा तेल उछला तो इनका कॉस्ट स्ट्रक्चर हिलता है।

डिफेंस

युद्ध का माहौल हो और डिफेंस स्टॉक्स शांत रहें—ऐसा कम ही होता है। बढ़ते रक्षा बजट की उम्मीद से शेयरों में हलचल आ सकती है।

आम आदमी क्या करे?

भारत की अर्थव्यवस्था फिलहाल मजबूत डेटा दिखा रही है। हालिया तिमाही में 7%+ ग्रोथ इसका संकेत है। घबराकर अच्छे स्टॉक्स बेचना अक्सर बाद में पछतावे में बदलता है। अगर पोर्टफोलियो में बहुत हाई रिस्क है तो रीबैलेंस करें, लेकिन Fear Selling से बचें।

मिसाइलें वहां, महंगाई यहां

दुनिया के नक्शे पर कोई रॉकेट उड़ता है, और हमारे शहर में ऑटो वाला कहता है “साहब, तेल महंगा हो गया।”

युद्ध की खबरें डरावनी होती हैं, लेकिन बाजार का इतिहास कहता है पैनिक अस्थायी है, अर्थव्यवस्था की दिशा लंबी। अगले कुछ दिन ग्लोबल मार्केट्स में हलचल तय है। सवाल सिर्फ इतना है—आप निवेशक हैं या न्यूज़ एंकर?

Trade, Tech और Terror पर तेल अवीव से PM मोदी का स्ट्रेटेजिक संदेश

Related posts

Leave a Comment