
देश के सबसे स्वच्छ शहर के तमगे वाले इंदौर में हालात डराने वाले हैं। भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल ने अब तक 10 लोगों की जान ले ली, जबकि 212 लोग अस्पतालों में भर्ती हैं। इनमें से 50 मरीज ठीक होकर घर लौट चुके हैं, लेकिन डर और गुस्सा दोनों कायम हैं।
जहां लोग साफ पानी मांग रहे हैं, वहीं सवाल पूछना भी अब “फोकट” माना जाने लगा है।
दूषित पानी विवाद: सवाल पूछे तो मंत्री भड़के
इंदौर-1 विधानसभा के प्रभारी और नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से जब एक स्थानीय न्यूज़ चैनल ने हालात पर सवाल किया, तो मंत्री कैमरे के सामने ही आपा खो बैठे।
उनका जवाब था— “छोड़ो यार, फोकट प्रश्न मत पूछो”
इतना ही नहीं, बातचीत के दौरान आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल भी हुआ। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही मामला राजनीतिक तूफान बन गया।
बाद में मांगी माफी, बोले– “शब्द सही नहीं थे”
विवाद बढ़ने पर मंत्री विजयवर्गीय ने माफी मांगते हुए कहा—
“मैं और मेरी टीम दो दिनों से लगातार क्षेत्र में काम कर रही है। दूषित पानी से लोग पीड़ित हैं और कुछ हमारी निगरानी में रहते हुए चले गए। इस दुख की घड़ी में मेरे शब्द सही नहीं थे, इसके लिए खेद है।”
उन्होंने यह भी कहा कि जब तक लोग पूरी तरह सुरक्षित नहीं होंगे, वे चैन से नहीं बैठेंगे।

Congress Attack: इस्तीफे की मांग तेज
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मंत्री का वीडियो X (Twitter) पर शेयर करते हुए तीखा हमला बोला।
उनका कहना था— इंदौर में लोग जहरीला पानी पीकर मर रहे हैं। जिम्मेदार मंत्री सवाल सुनना तक नहीं चाहते। पत्रकारों पर गुस्सा उतारा जा रहा है। पटवारी ने मुख्यमंत्री से मांग की कि नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए विजयवर्गीय को इस्तीफा देना चाहिए।
Ground Reality: भागीरथपुरा में अब भी डर
प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में टैंकरों से पानी सप्लाई बढ़ाई। पाइपलाइन और नालियों की सफाई शुरू की। पानी के सैंपल जांच के लिए भेजे।
लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है— “जब तक नल से साफ पानी नहीं आएगा, भरोसा नहीं होगा।”
- 10 मौतें, 212 बीमार
- स्वच्छ शहर की साख पर सवाल
- सत्ता और संवेदनशीलता आमने-सामने
- सवाल पूछना बना राजनीतिक जोखिम
यह सिर्फ पानी की नहीं, जवाबदेही की भी त्रासदी है।
इंदौर “स्वच्छ” है, लेकिन सवाल पूछना “गंदा” माना जा रहा है। शायद अगली रैंकिंग में नया पैरामीटर जुड़ जाए— Clean City, No Questions Asked.
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