EU की ‘Mother of Deals’ के बाद अमेरिका से बड़ा समझौता संभव

सैफी हुसैन
सैफी हुसैन, ट्रेड एनालिस्ट

EU के साथ ऐतिहासिक FTA ‘Mother of Deals’ साइन करने के बाद भारत को एक और बड़ी खुशखबरी मिल सकती है। सूत्रों के मुताबिक, India-US Trade Agreement को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज़ हो गई है। हालांकि अभी तक दोनों देशों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन कूटनीतिक हलचल साफ़ दिखाई दे रही है।

Jaishankar की US Visit से खुलेगा Trade का रास्ता?

विदेश मंत्री Dr. S. Jaishankar अगले सप्ताह अमेरिका जा सकते हैं। 4 फरवरी को वॉशिंगटन में होने वाली Critical Minerals Meeting में उनकी भागीदारी संभावित है। इस अहम बैठक की मेजबानी अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio करेंगे।

Diplomatic circles मान रहे हैं कि यही मीटिंग trade, tariff और oil import tensions पर बड़ा ब्रेकथ्रू ला सकती है।

Trump Tariffs ने बिगाड़े थे India-US Relations

राष्ट्रपति Donald Trump की aggressive tariff policy के बाद India-US trade relations में खटास आ गई थी। केवल भारत ही नहीं, बल्कि कई देशों को अमेरिकी टैरिफ का सामना करना पड़ा था।
India और US के बीच महीनों से चली आ रही trade gap और market access की समस्या अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

Russia Oil और Tariff Tension पर Deal संभव?

सूत्र बताते हैं कि इस बैठक में Russia से India के oil imports, US tariff concerns, और supply chain कोऑपरेशन जैसे मुद्दों पर सकारात्मक समाधान निकल सकता है।

अगर सहमति बनती है, तो यह डील भारत के लिए EU FTA के बाद दूसरा global trade milestone साबित हो सकती है।

EU Deal की गूंज पूरी दुनिया में

Republic Day के आसपास भारत-EU FTA पर हस्ताक्षर के बाद यूरोपीय नेताओं ने इसे खुद ‘Mother of Deals’ कहा था। इसकी गूंज अमेरिका समेत पूरी दुनिया में सुनाई दी — और माना जा रहा है कि इसी ने Washington को भी तेजी दिखाने पर मजबूर किया

Why This Deal Matters for India

  • Exports को मिलेगा boost
  • Manufacturing & Minerals sector में investment
  • Global supply chain में India की strong positioning
  • Geopolitical balance में India का पलड़ा भारी

EU के बाद अगर अमेरिका से भी trade agreement फाइनल होता है, तो यह भारत के लिए economic diplomacy का golden phase साबित हो सकता है। अब सबकी निगाहें 4 फरवरी की वॉशिंगटन मीटिंग पर टिकी हैं।

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