पाकिस्तान की गीदड़भभकी, भारत का सिंधु संधि पर एक्शन

अजमल शाह
अजमल शाह

22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने भारत को झकझोर दिया। जवाब में भारत ने सख्त कदम उठाए और 1960 की सिंधु जल संधि को आंशिक रूप से स्थगित करने का फैसला किया। भारत के इस रुख से पाकिस्तान की राजनीति में हलचल मच गई है — और अब बयानवीरों की सेना मैदान में उतर चुकी है।

“एक बूंद नहीं देंगे!” — शरीफ की पानी पर गीदड़भभकी

जो शहबाज शरीफ कल तक भारत से बातचीत की अपील कर रहे थे, अब वही गरजने लगे हैं। हाल ही में एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा:

“भारत पाकिस्तान के पानी की एक बूंद भी नहीं ले सकता। अगर ऐसा हुआ तो पछताना पड़ेगा।”

कभी बातचीत, कभी धमकी — शरीफ की बयानबाज़ी अब किसी भटके हुए वाटर टैंकर जैसी लग रही है, जिसे न दिशा पता है, न गहराई।

असीम मुनीर की मिसाइल वाली मिर्ची

पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने तो सीधा परमाणु बटन की धमकी दे दी। उन्होंने कहा:

“अगर भारत सिंधु नदी पर डैम बनाएगा, तो हम मिसाइल से गिरा देंगे। हमारे पास हथियारों की कमी नहीं है।”

यानि भारत डैम बनाए, और पाकिस्तान “डैम” ही नहीं देता! इस तरह की परमाणु-चटनी में डूबे बयान अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की फजीहत ही करा रहे हैं।

बिलावल भुट्टो का ‘पानी-पानी’ बयान

पूर्व विदेश मंत्री और PPP प्रमुख बिलावल भुट्टो भी पीछे नहीं रहे। उन्होंने चेतावनी दी कि:

“अगर भारत ने सिंधु जल संधि को एकतरफा खत्म किया, तो पाकिस्तान झुकेगा नहीं।”

समस्या ये है कि हर पाक नेता “नदी” के नाम पर “राजनीति” की नाव खेता नजर आ रहा है।

भारत का साफ संदेश: आतंक और बातचीत एक साथ नहीं

पहलगाम हमले के बाद भारत ने यह साफ कर दिया है कि आतंकवाद और डिप्लोमेसी एक साथ नहीं चल सकते। सिंधु जल समझौते को कूटनीतिक दबाव के रूप में इस्तेमाल करने का यह पहला बड़ा संकेत है। भारत ने संदेश दिया है:

आतंक होगा तो पानी भी रुकेगा।

पाकिस्तान की राजनीति — मुद्दों का मेला, हल का सूखा

  • आतंकी भेजो, और फिर बात करो?

  • पानी की एक-एक बूंद पर सियासत, मगर बाढ़ पीड़ितों की सुध नहीं

  • परमाणु ताकत बताकर डराने की कोशिश, जबकि देश की अर्थव्यवस्था ICU में

भारत अब पुराने तेवर में नहीं है।
पाकिस्तान को समझना होगा कि हर बार बयानबाज़ी और धमकियों से अंतरराष्ट्रीय समुदाय को प्रभावित नहीं किया जा सकता। पहलगाम जैसे आतंकी हमलों के बाद भारत का तेवर बदलना लाज़मी है — और पानी अब सिर्फ नदी का विषय नहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बन चुका है।

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