LPG पर ₹700 का भारी घाटा! क्या फिर बढ़ेंगे गैस सिलेंडर के दाम? सरकार ने बताया पूरा गणित

नई दिल्ली: घरेलू रसोई गैस इस्तेमाल करने वाले करोड़ों उपभोक्ताओं के लिए बड़ी खबर सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने के बावजूद तेल विपणन कंपनियों को घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, एक घरेलू गैस सिलेंडर पर कंपनियों की अंडर-रिकवरी करीब 700 रुपये तक पहुंच गई है। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि क्या आने वाले दिनों में गैस सिलेंडर की कीमतों में फिर बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

पेट्रोलियम मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, जहां पेट्रोल और डीजल पर होने वाला घाटा पहले की तुलना में काफी कम हो गया है, वहीं एलपीजी अभी भी तेल कंपनियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। फिलहाल पेट्रोल पर करीब 3 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर लगभग 27 रुपये प्रति लीटर का दबाव बताया जा रहा है।

एक सिलेंडर की लागत 1600 रुपये से ज्यादा

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, घरेलू एलपीजी सिलेंडर उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की कुल लागत 1600 रुपये से अधिक हो चुकी है। इसके मुकाबले ग्राहकों से वसूली जाने वाली कीमत काफी कम है। यही वजह है कि प्रत्येक सिलेंडर पर करीब 700 रुपये का घाटा दर्ज किया जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमत तय करने वाले सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (CP) में फरवरी के बाद से करीब 46 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जिससे आयात लागत लगातार बढ़ी है।

कुछ महीनों में दोगुना हुआ नुकसान

कुछ समय पहले तक घरेलू एलपीजी पर तेल कंपनियों को करीब 380 रुपये प्रति सिलेंडर का घाटा हो रहा था। लेकिन पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव, आपूर्ति संबंधी चुनौतियों और वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव के चलते यह नुकसान लगभग दोगुना होकर 700 रुपये तक पहुंच गया है।

सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां लंबे समय से इस अतिरिक्त बोझ को वहन कर रही हैं ताकि उपभोक्ताओं पर अचानक कीमतों का बड़ा असर न पड़े।

पेट्रोल-डीजल के मोर्चे पर मिली राहत

पेट्रोल और डीजल की स्थिति अब पहले की तुलना में बेहतर मानी जा रही है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने और युद्धविराम जैसे हालात बनने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है।

इसका फायदा भारतीय तेल कंपनियों को भी मिला है। हालांकि मई महीने में ईंधन कीमतों में कई बार बढ़ोतरी की गई थी, लेकिन उस दौरान भी कंपनियां पूरी लागत वसूल नहीं कर पा रही थीं। एक समय पेट्रोल पर करीब 24 रुपये और डीजल पर 30 रुपये प्रति लीटर तक का दबाव बताया गया था, जो अब काफी घट चुका है।

सरकार ने पहले भी किए थे बड़े फैसले

मार्च 2026 में सरकार ने उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की थी। इसी दौरान पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल पर निर्यात शुल्क भी लगाया गया था।

इसके बाद मई महीने में चार चरणों में ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी हुई। जून की शुरुआत में निर्यात शुल्क में कुछ राहत देकर बाजार संतुलन बनाने की कोशिश की गई।

फिलहाल कीमतों में बदलाव के संकेत नहीं

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि अभी जल्दबाजी में किसी नए ईंधन मूल्य संशोधन की संभावना नहीं दिख रही है। कच्चे तेल की कीमतों में आई हालिया नरमी का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा या नहीं, इस पर फिलहाल कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया गया है।

हालांकि एक राहत की खबर यह है कि एलपीजी की आपूर्ति व्यवस्था काफी हद तक सामान्य हो चुकी है। गैस बुकिंग का बैकलॉग घटकर करीब 3.3 दिन रह गया है, जो सप्लाई चेन में सुधार का संकेत माना जा रहा है।

सरकार की नजर वैश्विक बाजार पर

तेल कंपनियों के लिए फिलहाल सबसे बड़ी चिंता एलपीजी पर बढ़ता घाटा है। आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और एलपीजी की कीमतों का रुख, साथ ही सरकार की नीतियां तय करेंगी कि उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी या गैस सिलेंडर की कीमतों में बदलाव देखने को मिलेगा।

 

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