ठेकेदार की गुंडई से व्यापारी बेहाल, मंडलायुक्त–DM को सौंपा ज्ञापन

गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

गोरखपुर की विरासत गलियारा परियोजना, जिसे शहर की पहचान और विकास का चेहरा बताया गया था, आज ज़मीनी हकीकत में स्थानीय व्यापारियों के लिए अभिशाप बन चुकी है।
जहां एक ओर फाइलों में “Smart Development” लिखा है, वहीं सड़कों पर गड्ढे, कीचड़ और गंदा पानी व्यापार की सांसें रोक रहा है।

सुस्ती, खुदाई और Chaos: रोज़गार पर सीधा वार

व्यापारियों का आरोप है कि नालियों और सड़क निर्माण के नाम पर महीनों पहले खुदाई कर दी गई, लेकिन काम आगे बढ़ाने की कोई urgency नहीं दिखी।
खुले गड्ढे, चारों तरफ मलबा, नालियों का पानी सड़कों पर बहता हुआ। नतीजा? ग्राहक गायब, दुकानें सूनी और कई परिवार भुखमरी की कगार पर।

“हम विकास विरोधी नहीं, अव्यवस्था विरोधी हैं”

समस्त व्यापार मंडल के नितिन जायसवाल और गुड्स एंड ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष मनीष सिंह के नेतृत्व में धर्मशाला से जटाशंकर तक के व्यापारी मंडलायुक्त और जिलाधिकारी से मिले।

नितिन जायसवाल ने साफ कहा, “हम विरासत गलियारा परियोजना के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन बिना प्लानिंग के गड्ढे खोदकर छोड़ देना सीधे-सीधे व्यापारियों की रोज़ी पर हमला है।”

ठेकेदार की गुंडई: शिकायत पर गाली और मारपीट!

मामला सिर्फ अव्यवस्था तक सीमित नहीं रहा। मनीष सिंह ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ठेकेदार के लोग परेशानी बताने पर गाली-गलौज और मारपीट पर उतर आते हैं। डर का माहौल ऐसा है कि व्यापारी अपनी ही दुकानों पर खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

Development project में bullying और fear culture—यही सबसे बड़ा सवाल है।

व्यापारियों की सीधी मांगें (No Rocket Science!)

व्यापारियों ने प्रशासन के सामने कुछ basic लेकिन ज़रूरी मांगें रखीं, जहां काम हो, वहां 1–2 दिन पहले ही खुदाई। उसी गति से काम पूरा किया जाए। मलबा तुरंत हटाया जाए। नालियों की नियमित सफाई। खुले गड्ढों को फौरन भरा जाए। मतलब साफ है—काम करो, लेकिन इंसानों की तरह।

प्रशासन का रुख: चेतावनी और Action का वादा

मंडलायुक्त ने व्यापारियों की बात गंभीरता से सुनी और जिलाधिकारी को तत्काल निर्देश दिए, व्यापारियों से संवाद, समस्याओं का त्वरित समाधान। अभद्र व्यवहार करने वाले ठेकेदारों पर कार्रवाई। जरूरत पड़ी तो ऐसे लोगों को परियोजना से बाहर किया जाएगा।

अब सवाल यही है—कागज़ से ज़मीन तक कार्रवाई कब पहुंचेगी?

ये रहे आंदोलन की आवाज़ बने नाम

इस दौरान देवेश वैश्य, अनूप कुमार गुप्ता, आलोक वैश्य, अनुराग गुप्ता, सुशील कुमार, कविता रमानी, विनोद कुमार गुप्ता, योगेंद्र वैश्य, साहिल जायसवाल समेत दर्जनों व्यापारियों ने अपनी पीड़ा खुलकर रखी।

विकास तभी meaningful होता है जब वो स्थानीय लोगों की रोज़ी न छीने। अगर विरासत गलियारा सच में शहर की शान बनना है, तो पहले उसे जनता-फ्रेंडली बनाना होगा।

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