सिर्फ बृजभूषण का दबदबा है, तो सुन लो… मेरा भी दबदबा था, है और रहेगा

अजमल शाह
अजमल शाह

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के नवाबगंज में आयोजित 8 दिवसीय राष्ट्रकथा ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि जब धर्म, राष्ट्र और संस्कृति एक मंच पर मिलते हैं, तो भावनाओं का ज्वार थामना आसान नहीं होता।

कथावाचक सद्गुरु रितेश्वर महाराज के ओजस्वी और तीखे शब्दों ने श्रोताओं को ही नहीं, बल्कि भाजपा नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह को भी भावुक कर दिया। मंच पर बैठे-बैठे उनकी आंखों से आंसू बहने लगे—और वही दृश्य अब सोशल मीडिया पर वायरल है।

क्या बोले सद्गुरु, क्यों छलके आंसू?

राष्ट्रकथा के दूसरे दिन पूजा-अर्चना के बाद सद्गुरु रितेश्वर महाराज ने मंच से जो कहा, वह पूरे पंडाल में गूंज उठा— “अगर कोई सोचता है कि उत्तर प्रदेश, गोंडा या भारत में सिर्फ बृजभूषण का दबदबा है, तो सुन लो… मेरा भी दबदबा था, है और रहेगा।”

यह वाक्य अहंकार नहीं, आत्मबल का प्रतीक था—लेकिन मंच पर बैठे बृजभूषण शरण सिंह इसे सुनकर खुद को रोक नहीं पाए। उन्होंने महाराज को प्रणाम किया और भावनाओं में डूबते हुए आंसू पोंछते नजर आए।

मंचों पर कठोर दिखने वाला चेहरा, राष्ट्रकथा के मंच पर पिघल गया।

क्या बोले बृजभूषण सिंह?

बृजभूषण शरण सिंह कहते हैं— “हमने कभी किसी से कुछ लिया नहीं। मां भारती, राम, कृष्ण और हनुमान के लिए कथा की है। हमारा प्रयास सनातन को जोड़ने का है।”

यह बयान उनके समर्थकों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।

राष्ट्रकथा का अर्थ क्या है? सद्गुरु का साफ संदेश

सद्गुरु रितेश्वर महाराज ने राष्ट्रकथा को लेकर स्पष्ट किया— कभी पैसे लेकर कथा नहीं की। यह सेवा केवल राम और राष्ट्र के लिए है। राष्ट्रकथा का अधिकार वही पा सकता है जो पूर्ण समर्पण रखता हो।

उन्होंने कहा— “जो अपनी जवानी, वाणी, कहानी और ज़िंदगी राष्ट्र की एकता के लिए अर्पित करता है, वही राष्ट्र को जोड़ सकता है।”

सरयू की पावन धरती पर इस कथन ने माहौल को और गंभीर बना दिया।

श्रद्धा का सैलाब! पौष पूर्णिमा पर 65 लाख की डुबकी, प्रयागराज बना Mini Kumbh

Related posts

Leave a Comment