चांदी धड़ाम, सोना फिसला—बाजार बोला: Safe Haven भी Safe नहीं!

सैफी हुसैन
सैफी हुसैन, ट्रेड एनालिस्ट

कमोडिटी बाजार में आज जो हुआ, उसने यह साफ कर दिया कि मार्केट में कुछ भी पत्थर की लकीर नहीं होता—यहां तक कि सोना और चांदी भी नहीं
MCX पर शाम 7:32 बजे जैसे ही स्क्रीन अपडेट हुई, चांदी के दामों ने ऐसा गोता लगाया कि ट्रेडर्स ने दोबारा आंखें मलकर देखा। चांदी सीधे ₹14,180 टूट गई, भाव आकर रुका ₹2,36,425 प्रति किलो पर। यह गिरावट बीते कई महीनों की सबसे तेज और डराने वाली स्लाइड मानी जा रही है।

सोना भी बोला—“आज मेरा भी मूड खराब है”

जो लोग सोच रहे थे कि “चलो, चांदी गिरी तो क्या, सोना तो संभाल लेगा”— उन्हें भी आज निराशा हाथ लगी।

सोने के दाम ₹1,258 टूटे, 24 कैरेट गोल्ड पहुंचा ₹1,36,751 प्रति 10 ग्राम। यानि जिस सोने को लोग संकट का दोस्त मानते हैं, आज वही खुद सहारा ढूंढता दिखा।

आखिर ऐसा क्या हुआ कि बाजार बिखर गया?

यह गिरावट कोई अचानक आया तूफान नहीं, बल्कि तीन बड़े फैक्टर्स का कॉकटेल है।

Index Rebalancing: तेजी का बिल अब चुकाना पड़ा

पिछले साल चांदी ने करीब 150% की शानदार दौड़ लगाई थी। लेकिन मार्केट का नियम बड़ा सीधा है— “जो जितना ऊपर जाता है, उसे सांस लेने नीचे भी आना पड़ता है।”

9 से 15 जनवरी के बीच Commodity Index में बदलाव हो रहा है, जहां— चांदी का वजन घटाया गया, कच्चे तेल जैसे सेक्टर्स को फायदा मिला, बड़े फंड्स ने बिना भावुक हुए बिकवाली कर दी।

मार्केट ने कहा—थैंक्यू फॉर प्रॉफिट, अब विदा।

डॉलर मजबूत, मेटल्स कमजोर

इधर US Dollar ने ताकत दिखाई, उधर सोना-चांदी दबाव में आ गए। जब डॉलर मजबूत होता है— विदेशी निवेशकों के लिए सोना महंगा खरीद घटती है और भाव फिसलते हैं।

मतलब साफ—डॉलर की एक मुस्कान, मेटल्स की हालत खराब।

ट्रंप फैक्टर: धमकी, डर और कैश की दौड़

डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से रूस पर 500% टैरिफ की चेतावनी ने ग्लोबल मार्केट में बेचैनी बढ़ा दी। ऐसे माहौल में निवेशक बोले— Safe Haven बाद में पहले Cash और डॉलर जब अनिश्चितता बढ़ती है, तो लोग चमक नहीं, तरलता पकड़ते हैं।

अब आगे क्या? और कितना फिसल सकते हैं दाम

मार्केट जानकारों की नजर अब दो बेहद अहम लेवल्स पर टिकी है— चांदी: ₹2.30 लाख प्रति किलो, सोना: ₹1.32 लाख प्रति 10 ग्राम। अगर ये स्तर टूटते हैं, तो गिरावट की अगली सीढ़ी भी तैयार है। हालांकि, हर गिरावट डराने के लिए नहीं होती—कभी-कभी यह खरीद का मौका भी बनती है।

शादी का सीजन: आखिरी उम्मीद

भारत में सोना-चांदी सिर्फ इन्वेस्टमेंट नहीं, रिवाज भी है। शादी-ब्याह के सीजन में— ज्वैलर्स की डिमांड- फिजिकल खरीदारी नीचे के स्तरों पर सपोर्ट दे सकती है।
यानी बाजार चाहे जो बोले, भारतीय शादी बोलेगी—“थोड़ा सोना तो चाहिए!”

चमक पर नहीं, समझ पर भरोसा करें

आज की गिरावट एक सबक छोड़ जाती है— Gold और Silver अब सिर्फ Safe Haven नहीं, हाई-वोलैटिलिटी Assets भी हैं। जो सिर्फ चमक देखकर निवेश करेगा, वह गिरावट में चौंकेगा। जो लेवल, ट्रेंड और ग्लोबल संकेत देखेगा— वही टिकेगा।

मार्केट में भावनाएं नहीं, समझ ही असली सोना होती हैं।

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