
अमेरिका की राजनीति में एक बार फिर ऐसा कागज़ फटा है जिसने व्हाइट हाउस से लेकर कांग्रेस तक सबको असहज कर दिया है। जेफरी एपस्टीन केस की नई फाइलें सार्वजनिक होते ही पुराने आरोप फिर जिंदा हो गए और इस बार निशाने पर हैं डोनाल्ड ट्रंप।
कागज़ों में दर्ज एक महिला के बयान ने पूरे सिस्टम को झकझोर दिया है। आरोप इतने गंभीर हैं कि वॉशिंगटन में सियासी बहस अब सीधे अदालत और संसद तक पहुंच गई है।
एपस्टीन फाइल्स का नया धमाका
अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट ने हाल ही में एपस्टीन केस से जुड़ी 15 ऐसी फाइलें जारी की हैं जिन्हें पहले सार्वजनिक नहीं किया गया था। वजह बताई गई कि इन्हें पहले “डुप्लीकेट रिकॉर्ड” समझकर गलत तरीके से कोड कर दिया गया था।
लेकिन जैसे ही ये दस्तावेज बाहर आए, उनमें दर्ज कुछ बयान सीधे डोनाल्ड ट्रंप के नाम तक पहुंच गए। बस यहीं से सियासी हलचल शुरू हो गई।
महिला का आरोप: “मैं नाबालिग थी…”
दस्तावेजों के मुताबिक एक महिला ने जांचकर्ताओं को बताया कि 1980 के दशक में कुख्यात सेक्स अपराधी जेफरी एपस्टीन ने उसकी मुलाकात डोनाल्ड ट्रंप से कराई थी।
उसका दावा है कि उस वक्त उसकी उम्र करीब 13 से 15 साल के बीच थी। महिला ने साल 2019 में FBI को दिए बयान में आरोप लगाया कि ट्रंप ने उससे जबरदस्ती की कोशिश की और कथित तौर पर कहा “मैं तुम्हें सिखाता हूं कि छोटी लड़कियों को कैसा होना चाहिए।”
महिला का कहना है कि जब उसने इनकार किया तो उसके साथ मारपीट भी की गई।

सरकार ने भी जोड़ी चेतावनी
हालांकि अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट ने इन दस्तावेजों के साथ साफ चेतावनी भी जारी की है। विभाग का कहना है कि इन फाइलों में दर्ज दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी है और इनमें झूठे या अपुष्ट आरोप भी हो सकते हैं। यानी दस्तावेज सामने हैं, लेकिन सच्चाई पर अंतिम मुहर अभी नहीं लगी है।
सियासत में छिड़ी नई लड़ाई
इन फाइलों के सामने आते ही अमेरिका की राजनीति में नया तूफान खड़ा हो गया है। यूएस हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में अब यह जांच चल रही है कि आखिर जस्टिस डिपार्टमेंट ने इन रिकॉर्ड्स को इतने सालों तक कैसे मैनेज किया और क्यों छिपे रहे। सांसदों ने अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी को पूछताछ के लिए समन भेजने के पक्ष में भी वोट किया है।
ट्रंप की टीम का पलटवार
व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि यह “बिना सबूत के लगाए गए सनसनीखेज आरोप” हैं और इन्हें राजनीतिक मकसद से उछाला जा रहा है। खुद डोनाल्ड ट्रंप पहले भी कह चुके हैं कि उनका एपस्टीन से रिश्ता 2000 के दशक में ही खत्म हो गया था और उन्हें उसके अपराधों के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।
असली सवाल अभी बाकी है
एपस्टीन केस वैसे भी अमेरिका की सबसे रहस्यमयी और विवादित फाइलों में गिना जाता है। अब नई फाइलों के बाहर आने से सवाल और बढ़ गए हैं क्या ये आरोप सच हैं? क्या ये सिर्फ राजनीतिक हमला है? या फिर एपस्टीन की कहानी का असली सच अभी भी पूरी तरह सामने नहीं आया?
एक बात तय है यह मामला अभी खत्म नहीं हुआ है, बल्कि अब असली राजनीतिक लड़ाई शुरू हुई है।
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